जनपद में 1,725 किलोमीटर में गंडक नहर और इसकी शाखाएं करती रही हैं खेतों की सिंचाई
- जगह-जगह जर्जर हो गए हैं नहर के पैनल
- पूर्व में कई बार टूट चुकी है गंडक नहर
- इसी नहर से निकले हैं रजवाहे और माइनरें
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। शहर से होकर बहने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की दशा दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। इस नहर के दोनों पैनल जर्जर होने के कारण पानी कम छोड़ा जा रहा है। पूर्व में इसके पैनल टूट भी चुके हैं, जिससे फसलों की काफी क्षति हुई। इस नहर के रजवाहे और माइनरें भी देखरेख के अभाव में जर्जर होती जा रही हैं। इससे इसकी सिंचन क्षमता घटती जा रही है। सभी खेतों तक नहर का पानी नहीं पहुंच पाता है। फिर भी इस नहर के जीर्णोद्धार की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू व नेपाल के तत्कालीन शासक राजा महेंद्र विक्रम शाह के बीच वर्ष 1959 में हुए समझौते के बाद मुख्य पश्चिमी गंडक नहर और वाल्मीकिनगर बैराज का निर्माण हुआ था। सत्तर के दशक में यह नहर अस्तित्व में आई। उत्तर प्रदेश में यह नहर करीब 3,207 किलोमीटर भूभाग में बनी है। महराजगंज जिले के बाद कुशीनगर के खड्डा, पडरौना, दुदही, सेवरही आदि क्षेत्रों से होकर बिहार प्रांत की सीमा में प्रवेश कर जाती है। इससे निकले लगभग 1,700 किलोमीटर लंबे रजवाहे और माइनरों से प्रदेश के इन जनपदों में 3.44 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है।
मौजूदा समय में खड्डा, नेबुआ नौरंगिया, पडरौना, दुदही और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में कई जगह इसके पैनल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। अधिक पानी छोड़ने पर इस नहर के पैनल टूट भी चुके हैं। पैनल क्षतिग्रस्त होने तथा सिल्ट भरते जाने से इसकी सिंचन क्षमता कम हो रही है, जिससे इसका पानी पूरी तरह रजवाहों और माइनरों में नहीं पहुंच पा रहा है। इस नहर के पैनल में झाड़ियां उगी हैं। उन्हें भी साफ नहीं कराया जाता है। लमुहा के किसान छोटेलाल सिंह, दांदोपुर के रामसूरत सिंह, रामपुर सोहरौना के शंभू प्रसाद, सिसवा मठिया के विष्णु श्रीवास्तव सहित अनेंक किसानों ने इस नहर के जीर्णोद्धार की मांग की है।
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इन तिथियों में टूटी थी नहर
नौ जून, 2019 दुदही ब्लॉक के बांसगांव के चटंगवा टोला के पास रिसाव के कारण नहर टूट गई थी। इससे दुदही के बांसगांव, खाखड़ टोला, चटंगवा, मंगुरही आदि गांवों में पानी घुसने से अफरातफरी मच गई थी। काफी मशक्कत के बाद मरम्मत हुई थी।
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एक नवंबर-2020 में टूट गया था पैनल
पैनल में रिसाव के कारण एक नवंबर 2020 को खड्डा क्षेत्र के गैनही जंगल गांव के पास नहर टूट गई थी। इसका लगभग 200 हिस्सा टूटकर बह गया था। इससे किसानों की फसलों की काफी क्षति हुई थी। वर्ष 2018 में बंजारीपट्टी गांव के पास नहर टूटने से 100 एकड़ से अधिक फसल बर्बाद हुई थी। वर्ष 1993 के आसपास पडरौना में मुख्य पश्चिमी गंडक का पैनल टूटने से पूरे शहर में बाढ़ आ गई थी। कई दिनों तक शहर के लोगों को जलभराव से जूझना पड़ा था। इसके अलावा सेखुई गांव के सामने भी यह नहर टूट चुकी है।
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कोट
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर का प्रोजेक्ट बहुत बड़ा है। इस पर एक बार में काम होना संभव नहीं है। इस नहर के सबसे खराब हिस्सों को चिह्नित कर 200 से 300 मीटर तक काम कराने के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। उसके बाद उसे शासन को भेज दिया जाएगा। प्रस्ताव स्वीकृत होने और बजट आने पर काम होगा।
बी. राम, एक्सईएन, सिंचाई
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कोट
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के रेग्युलेटर की मरम्मत तो राज्य सरकार करा देती है, लेकिन जीर्णोद्धार अथवा पैनल की मरम्मत की स्वीकृति केंद्र सरकार की तरफ से दी जाती है। इस नहर के जीर्णोद्धार के लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से मिलकर अवगत कराया जाएगा।
विजय कुमार दुबे, सांसद