रोबोट के साथ महेंद्र कुशवाहा।संवाद।
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दिव्यांग छात्र ने बनाया मोबाइल फोन से चलने वाला रोबोट
दुदही (कुशीनगर)। किसी के भीतर कुछ करने का हौसला और हुनर हो तो शारीरिक अक्षमता आगे बढ़ने में कहीं बाधक नहीं बनती। यह साबित किया है दुदही विकास खंड के नारहवा कीरत पट्टी गांव निवासी व आठवीं के छात्र महेंद्र कुशवाहा ने। दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बाद भी रोबोट बना देने वाले इस छात्र की क्षेत्र में काफी चर्चा है। उनका मॉडल रोबोट देखकर फाजिलनगर के विधायक सुरेंद्र कुुशवाहा ने सराहना की है। विद्यालय के प्रधानाचार्य रमेश चंद कुशवाहा ने बच्चे का हुनर देखकर उनकी 12वीं तक पढ़ाई की फीस माफ कर दी है।
नारहवा कीरत पट्टी गांव निवासी ओमप्रकाश कुशवाहा की गांव के चौराहे पर छोटी सी चाय की दुकान है। उनकी तीन संतानें महेंद्र (12), अवधेश (10) और मनीषा (8) हैं। तीनों बच्चे गांव के ही राधाकृष्ण मेमोरियल इंटर कॉलेज में पढ़ते हैं। दिव्यांग महेंद्र कुशवाहा आठवीं के छात्र हैं। महेंद्र ने अपने हुनर से रोबोट बनाया है, जिसके लिए उन्होंने ऑनलाइन सामान की खरीदारी 4960 रुपये में की थी।
मोबाइल एप से रोबोट जुड़ा है। रोबोट को मोबाइल फोन से संचालित किया जा रहा है। वह रोबोट दाएं और बाएं घूमने, हाथ उठाने इत्यादि कहने पर काम कर रहा है। गूगल से जुड़े होने की वजह से वह सवालों के जवाब भी दे रहा है। रोबोट बनाने के पूर्व महेंद्र ने चार सौ रुपये की लागत से एक ट्रक बनाया था। ट्रैक्टर-ट्राली, जेसीबी सहित अन्य मॉडल वह तैयार कर चुके हैं। इसके अलावा वह हेलीकाप्टर भी बना चुके हैं, जिसे करीब 60 फीट की ऊंचाई तक उड़ाया गया था। नन्हें वैज्ञानिक का रोबोट देखने के लिए लोग उनके घर पहुंच रहे हैं। इन सब चीजों को तैयार करने में वह गूगल की मदद भी लेते हैं।
इस संबंध में महेंद्र कुशवाहा का कहना है कि वह चीजों को देखकर सीखने का प्रयास करते हैं। कुशीनगर में सामान नहीं मिलने पर उसके पुर्जे ऑनलाइन मंगाते हैं। उनकी इच्छा बड़ा होकर वैज्ञानिक बनने की है।