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मदनी मस्जिद प्रकरण: मालिकाना हक की लड़ाई अब हाईकोर्ट में

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हाटा। करमहा चौराहा स्थित मदनी मस्जिद प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से जिला प्रशासन को फिलहाल अवमानना के मामले में राहत मिल गई है। हालांकि, विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। मस्जिद की भूमि और मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्ष अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
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मदनी मस्जिद के एक हिस्से पर नौ फरवरी 2025 को जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की थी। प्रशासन का दावा था कि निर्माण का कुछ भाग सरकारी भूमि पर था और कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई। दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी ने कार्रवाई को नियमों के विपरीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। याचिका में तत्कालीन जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, नगर पालिका और पुलिस के कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई के दौरान प्रशासन से जवाब तलब करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की थी। बाद में राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा। 16 जुलाई को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही पहले लागू अंतरिम संरक्षण भी समाप्त हो गया।
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हालांकि, मामले का मूल विवाद अभी बाकी है। मस्जिद जिस भूमि पर बनी है, उसके स्वामित्व और कब्जे को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि का कुछ हिस्सा सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, जबकि मस्जिद कमेटी इसे वैध निजी भूमि बताती है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश केवल अवमानना याचिका तक सीमित है। भूमि के स्वामित्व और अधिकार का अंतिम फैसला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित वाद के आधार पर होगा। ऐसे में मदनी मस्जिद प्रकरण की कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी और दोनों पक्ष हाईकोर्ट में अपने-अपने दावे और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
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