हाटा। नगर के करमहा चौराहा स्थित मदनी मस्जिद पर प्रशासन की तरफ से हुई कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के जवाब मांगने के बाद से अफसर जवाब तैयार करने में जुटे हुए है।
कोर्ट में अधिकारियों को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। वहीं मस्जिद कमेटी के लोग भी साक्ष्य जुटा कर कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती के साथ रखने की तैयारी कर रहे है। देखना है कि दो सप्ताह बाद कोई में अधिकारी क्या जवाब दाखिल कर रहे है। फिर हाल मौके पर शांति बनी हुई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
नौ फरवरी को हाटा की मदनी मस्जिद के एक हिस्से पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद मस्जिद कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। उसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मस्जिद पर आगे से कोई भी तोड़फोड़ की कार्रवाई करने पर रोक लगाते हुए अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
दो दशक से अधिक समय से निर्माणाधीन हाटा की मदनी मस्जिद के एक हिस्से को प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बना होना बताते हुए बीते नौ फरवरी को प्रशासन बुलडोजर लगा कर तोड़वा दिया था। इसके बाद मस्जिद कमेटी की ओर से प्रशासन पर आरोप लगाया गया था कि प्रशासन ने बगैर उन्हें पूर्व सूचना दिए मस्जिद पर बुलडोजर चला दिया। इस मामले को लेकर मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मस्जिद पर आगे से किसी भी तोड़फोड़ की कार्रवाई से रोक लगाते हुए प्रशासन के अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। इधर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद कमेटी को तीन बार नोटिस के माध्यम से उन्हें सूचना दी गई थी। पूरा जवाब तैयार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
मस्जिद कमेटी के पूरी मस्जिद को बैनामे की जमीन बताया है, जबकि प्रशासन ने मस्जिद के कुछ हिस्से को नजूल और पुलिस विभाग की जमीन पर बना होना बताया है।