पडरौना। ‘शुरू मजबूरी में किया था, लेकिन अब मजा आ रहा है’ मशहूर वेब सीरीज मिर्जा का यह डायलॉग उन युवा अपराधियों पर सटीक बैठता है, जिन्होंने कभी गरीबी दूर करने के लिए रातों-रात रईसी के सपने देख जरायम की दुनिया में कदम रखा। अब वह अपराध के दलदल में इस कदर धंस गए हैं कि वहां से निकलना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
एक जुर्म को छिपाने के लिए वह दूसरे को अंजाम दे रहे हैं। अपराध की अलग-अलग श्रेणी में खुद को इन युवाओं ने ऐसा तैयार किया है कि पेशेवर भी अपने धंधे से अलग-थलग होकर पर्दे के पीछे से युवाओं को टारगेट सौंपकर आगे बढ़ा रहे हैं।
जिले में पशु तस्करी, शराब तस्करी, लूट, छिनैती, चोरी, रंगदारी आदि आपराधिक मामलों में 75 फीसदी तक युवा चेहरे ही पुलिस की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसके अलावा बड़े स्तर के फर्जीवाड़े, साजिश में भी युवाओं की संलिप्तता मिली है।
ऐसे में इस पूरे आपराधिक गतिविधियों के पीछे कारण जो भी हो, इन वेब सीरीज से उपजी आपराधिक कहानियों का अक्स युवाओं के अपराध करने के तरीके में नजर आ रहा है। संगीन अपराध की अलग-अलग गतिविधियों में युवा अपराधियों की पौध तैयार हो गई है। इस पूरे पेशे में स्थानीय स्तर पर पूर्वांचल और सीमावर्ती बिहार के इलाकों से जुड़े महाकाल ग्रुप व रफ्तार गैंग भी सहयोग करते हैं।
कोरोना की महामारी के कारण थिएटर में प्रतिबंध लगा तो ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफार्म ने अपराध-कथाओं व भूत-प्रेत की कथाओं के साथ युवाओं के बीच अपनी धाक जमा दी। मुंबई और दिल्ली तक होने वाले बड़े हत्या की साजिश और फर्जीवाड़े में यहां के युवाओं की गिरफ्तारी हुई।
सलमान खान की हत्या की साजिश में तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र का एक युवक गिरफ्तार युवा था। वहीं, दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तमकुही के लतवाजीत के एक युवक को फर्जीवाड़े के मामले में उठाया था। लूट, छिनैती जैसी घटनाओं में भी पुलिस ने पिछले दिनों ऐसे ही कम उम्र के लड़कों को गिरफ्तार किया। चोरी, नकबजनी और डकैती जैसे अपराधों में भी कम उम्र के लड़कों का ग्राफ पेशेवरों से अधिक है। पिछले एक साल में देखे तो पुलिस के मुताबिक बड़े से बड़े और छोटे से छोटे अपराधों में पुलिस को कम उम्र के लड़के हाथ लगे है