खड्डा। कुश्ाीनगर जिले के कस्बे की एक महिला ने पुरानी रूढ़ियों और परंपराओं को काफी पीछे छोड़कर बृहस्पतिवार को न केवल अपने पति की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि अर्थी के साथ श्मशान पहुंचकर मुखाग्नि भी दी। उसके इस कार्य की खड्डा कस्बे के कई लोग गवाह थे, जिनके सामने इस महिला ने पत्नी होने का कर्तव्य निभाया।
खड्डा कस्बे के वार्ड नंबर-तीन लोहिया नगर निवासी परसादी (45) मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। बाद में वह एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए। उनकी पत्नी अमरावती ने पति के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी। जिसने जहां बताया, अमरावती अपने दुधमुंहे बच्चे को कलेजे से लगाए पति को वहां इलाज कराने ले गई। काफी रुपये खर्च हो जाने के बाद भी वह अपने पति परसादी को बचा नहीं पाई। बुधवार की रात में प्रसादी का देहांत हो गया। इसके बाद अमरावती पर मुसीबत का पहाड़ टूट गया। वह गोद में अपने डेढ़ साल के दूधमुंहे बच्चे को लेकर विलाप करने लगी। उसके रोने की आवाज सुनकर मुहल्ले के लोग एकत्र हो गए और उसे काफी समझाया। चूंकि परसादी की पत्नी और डेढ़ वर्ष के बच्चे के अलावा उनका कोई नहीं है। इसलिए परसादी खुद को असहाय महसूस कर रही थी। विलाप करते हुए वह कहती रही कि अब उसके बच्चे की परवरिश कैसे होगी? उसका और बेटे का भरण-पोषण कैसे होगा?
गांववालों की मदद से उनकी अंत्येष्टि की सामग्री एकत्र की गई। उसके बाद वह मुहल्ले के लोगों के साथ पति के शव को कंधा देेती हुई सुबह नारायणी नदी के भैसहां घाट पर गई, जहां उसने अपने पति की अर्थी को मुखाग्नि भी दी। एक महिला का अपने पति की अर्थी को कंधा देना और फिर मुखाग्नि पूरे खड्डा क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा।