दुदही। गंडक नदी के पिपरा-पिपरासी तटबंध पर बिहार प्रांत के भूईंधरवा गांव के सामने दो जगह रैटहोल से रिसाव हो रहा है। इसके चलते दुदही क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। सोमवार को रिसाव की बात सामने आने के बाद इन गांवों के लोग सहम गए हैं। बिहार के सिंचाई विभाग ने दोनों जगह बचाव कार्य शुरू करा दिया है।
गंडक नदी का पिपरा-पिपरासी तटबंध बिहार प्रांत की सीमा में पड़ता है, लेकिन इस बांध के किनारे सर्वाधिक गांव कुशीनगर जिले के हैं। 35 किलोमीटर लंबे इस बांध का रखरखाव बिहार का सिंचाई विभाग ही करता है। दुदही क्षेत्र में इस बंधे के अंतिम बिंदु किलोमीटर 34 व किलोमीटर 35 पर दो जगह बड़ी संख्या में रेनकट व रैटहोल है। रविवार को जब गंडक नदी का डिस्चार्ज तीन लाख क्यूसेक से ऊपर गया तो इस जर्जर बंधे के रैटहोल से पानी का रिसाव होने लगा। सोमवार की सुबह इसकी जानकारी होते ही बिहार प्रांत के भूईंधरवा तथा कुशीनगर जिले के दुदही ब्लाक के गांव आमवा खास, अमवा दीगर, पिपरही, धोकरहा, कतरा, उल्टाहवा, मिश्रौली, बांसगांव, दशहवा, चकदहवा, कामिल टोला, रामपुर जमुनिया, रामपुर बरहन, रामपुर पट्टी, चौबेया पटखौली, गौरी जगदीश, गौरी शुक्ल, बिनटोली खानगी, लक्ष्मीपुर आदि गांवों के लोग सहम गए। बंधे में रिसाव की जानकारी होते ही बिहार के सिंचाई विभाग के अभियंता और अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे। अभियंताओं ने प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी व गिट्टी डालकर रिसाव वाली जगह पर ब्लाक बनाया। इस बांध के एसडीओ रामचंद्र ने बताया कि काफी हद तक स्थिति नियंत्रण में है। मौके पर बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। गांव वालों के अनुसार करीब पांच साल पहले भी बरसात में बंधा इसी जगह टूटा था। कई साल से मरम्मत न होने के चलते बंधा जर्जर हो गया है।