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जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव

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जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव
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पडरौना। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या निरंतर कम होने से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। अस्पताल में 37 के सापेक्ष 23 डॉक्टर ही बचे हैं। इनमें भी न तो कोई पुरुष इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर है और न ही महिला ईएमओ। चार गायनोकोलॉजिस्ट में से आज की तारीख में एक भी तैनात नहीं हैं। फिजिशियन, सीनियर रेडियोलॉजिस्ट सहित कई डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। ऐसे में मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है। दुष्कर्म या प्रसव संबंधी मरीज यदि गंभीर हालत में पहुंच जाएं तो इनके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें तत्काल रेफर कर दिया जाता है।
100 बेड के इस अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 25 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष 20 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। अस्पताल के बगल में महिलाओं और बच्चों के बेहतर इलाज के लिए 19.20 करोड़ रुपये खर्च कर 100 बेड का पांच मंजिला मॉडर्न मैटर्निटी एंड चाइल्ड हेल्थ विंग बना है, लेकिन संचालन शुरू होने के कुछ ही महीने बाद कोरोना महामारी का संक्रमण शुरू हो गया था, जिसके बाद यह कोविड अस्पताल में तब्दील हो गया। तब से इस अस्पताल में कोरोना जांच और टीकाकरण हो रहा है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के एक, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के दो पदों के सापेक्ष एक, वरिष्ठ फिजिशियन रिक्त, वरिष्ठ शल्यक एक के सापेक्ष दो, सीनियर रेडियोलॉजिस्ट एक, फिजिशियन रिक्त, शल्यक एक, एनेस्थेटिस्ट दो, रेडियोलॉजिस्ट रिक्त, वरिष्ठ पैथालॉजिस्ट एक, पैथालॉजिस्ट रिक्त, नेत्र सर्जन एक के सापेक्ष दो, बाल रोग विशेषज्ञ एक के सापेक्ष चार, हृदय रोग विशेषज्ञ एक, हड्डी रोग विशेषज्ञ एक, ईएमओ पुरुष चार पदों के सापेक्ष शून्य, ईएनटी सर्जन एक, चिकित्साधिकारी तीन के सापेक्ष एक और दंत चिकित्सक एक तैनात हैं।
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एमएमसीएच विंग के लिए सृजित पद
मॉडर्न मैटर्निटी एंड चाइल्ड हेल्थ (एमएमसीएच) विंग के लिए चिकित्सा अधीक्षक का एक, बाल रोग विशेषज्ञ का एक, गायनोकोलॉजिस्ट के दो, आर्थेस्टेट्रीशियन के दो, ईएमओ महिला के तीन और महिला चिकित्साधिकारी के तीन सहित 12 पद सृजित हैं, लेकिन मौजूदा समय में सभी रिक्त हैं। एक पुरुष एवं दो महिला डॉक्टर संविदा पर तैनात थीं, जो कुड माह पूर्व त्यागपत्र देकर जा चुकी हैं।
पैरामेडिकल स्टॉफ और अन्य पदों की स्थिति
जिला अस्पताल में मैटर्न का एक पद रिक्त है। जबकि सिस्टर के 18 पदों के सापेक्ष तीन और नर्स उपचारिका के 41 के सापेक्ष 30 कार्यरत हैं। चीफ फार्मासिस्ट के दो पदों के सापेक्ष पांच, फार्मासिस्ट के पांच पदों के सापेक्ष चार, एक्सरे टेक्निशियन दो, प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ पांच के सापेक्ष तीन, डेंटल हाइजिनिस्ट एक, ईसीजी टेक्निशियन एक, एसएलटी चार, नेत्र परीक्षण अधिकारी दो, फिजियोथेरिपिस्ट रिक्त और प्रयोगशाला सहायक छह के सापेक्ष चार तैनात हैं। इस तरह 89 पदों के सापेक्ष 59 लोग ही तैनात हैं। चतुर्थ श्रेणी व अन्य स्टॉफ के सृजित 69 पदों के सापेक्ष सिर्फ आठ लोग ही तैनात हैं। इस वजह से जिला अस्पताल में आने वाले लोगों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
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यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की अब काफी कमी हो गई है। गायनोकोलॉजिस्ट, फिजिशियन, ईएमओ जैसे महत्वपूर्ण डॉक्टर नहीं हैं। एक गायनोकोलॉजिस्ट कुछ दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुई हैं। अन्य पदों में भी अधिकांश खाली हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। उपलब्ध संसाधनों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की कोशिश की जा रही है।
डॉ. बजरंगी पांडेय,
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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