कुशीनगर। जिले में डग्गामार बसों का संचालन बिहार प्रांत से गोरखपुर तक बेरोक-टोक हो रहा है। जिले के अंदर भी अलग-अलग मार्गों पर डग्गामार बसें दौड़ लगा रही हैं। इनके संचालन पर कोई कायदा-कानून अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिम्मेदार भी कार्रवाई करने से कतराते हैं। स्थिति इतनी खराब है कि पडरौना और कसया बस स्टेशन के सामने ही सड़क पर बसें खड़ा कर सवारियों को भरा जा रहा है।
परिवहन निगम का कोई बस चालक या परिचालक इनका विरोध करता है तो यह मारपीट पर आमादा हो जाते हैं। यही नहीं डग्गामार बस चालक और उसके हेल्पर मनबढ़ होते हैं, यात्रियों को जबरन बसों में बिठा लेते हैं। इन डग्गामार बसों का संचालन प्रशासन की मौन स्वीकृति और शह को साबित कर रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार डग्गामार बसों के संचालन को लेकर बेपरवाह बने हुए हैं।
जिले में पडरौना और कसया में परिवहन निगम का बस स्टेशन है। इन स्टेशनों से गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर दिल्ली, देवरिया सहित अन्य गंतव्यों के लिए रोडवेज की बसें संचालित की जा रही हैं। वहीं, इन्हीं बस स्टेशन के सामने बिहार प्रांत के बेतिया, गोपालगंज, सिवान से पडरौना और कसया बस स्टेशन से गोरखपुर तक डग्गामार बसों का संचालन संचालन किया जा रहा है।
डग्गामार वाहनों के यात्रियों के भरने के लिए नगर निकायों की तरफ से चिह्नित स्थलों पर नहीं, बल्कि स्टेशन के प्रवेश व निकास द्वार पर ही खड़ी कर सवारियों को भरा जा रहा है। इससे जाम भी लगता है, लेकिन इन डग्गामार बसों के बेरोकटोक संचालन को बंद कराने को लेकर कोई जिम्मेदार आगे नहीं आता है। इसका डग्गामार बसों के संचालक फायदा उठाते हैं। जबरन सवारियों को बसों में बैठाकर ले जाते हैं। हालांकि, नगरपालिका प्रशासन की तरफ से आवंटित ठेकेदार वाहन अड्डा के नाम पर इनसे निर्धारित शुल्क लेते हैं।
ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग भी करता है अनदेखी ः बस स्टेशन स्थलों से डग्गामार वाहनों के संचालन को ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग भी अनदेखी करता है। इसका नतीजा है कि डग्गामार बसों का संचालन निर्बाध तरीके से दबंगई व नियमों की अनदेखी कर हो रहा है। कभी-कभी ये खानापूर्ति करने को लेकर डग्गामार बसों के संचालन को लेकर सूक्ष्म कार्रवाई कर इतिश्री कर लेते हैं।
जबकि, डग्गामार बसों का संचालन सवारी ढोने के लिए नहीं है। उन्हें बुकिंग का परमिट जारी होता है। कसया बस स्टेशन के पास यह सहज ही देखा जा सकता है।
जहां यूपी पुलिस, यातायात पुलिस व स्थानीय थाने की पुलिस गांधी चौक से बस स्टेशन तक तैनात रहती है, लेकिन उन्हें शायद ये डग्गामार बसें दिखाई नहीं देते या इनकी भी संचालन में मिलीभगत है। यह दृश्य सुबह से देर रात तक बनी रहती है।
एक किमी दायरे में डग्गामार वाहन अड्डा नहीं ः इन डग्गामार बसों के संचालन पर शासनादेश का भी कोई फर्क नहीं है। नियम के अनुसार बस स्टेशन के एक किलोमीटर के दायरे में कोई वाहन अड्डा नहीं होना चाहिए, लेकिन अड्डा कौन कहे, डग्गामार बसों में रोडवेज की सवारियों को भी जबरन बैठा लिया जाता है। यह सरेआम होता है। डग्गामार बसों के संचालकों की मनबढ़पन, दबंगई और जिम्मेदार प्रशासन के लोगों की सह से वह विरोध करने वालों से अभद्रता करने लगते हैं।