कुपोषण के खिलाफ जंग हार रहा कुशीनगर
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पडरौना। 71 हजार से अधिक कुपोषित और 25 हजार से अधिक अति कुपोषित बच्चे। यह आंकड़ा कुशीनगर में कुपोषण के खिलाफ जंग की हकीकत बयां करने के लिए काफी है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए शासन स्तर पर योजनाओं के साथ ही तमाम दावे और वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर इसका कुछ खास असर होता नहीं दिख रहा है।
जनपद के ग्रामीण इलाकों में स्थिति काफी खराब है, लेकिन नगर क्षेत्र में भी हालाता बहुत बेहतर नहीं हैं। यहां भी कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या दो हजार के पार है। बहरहाल, बिगड़ते हालात को प्रशासन ने भी गंभीरता से लिया है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग जल्द ही शबरी संकल्प योजना शुरू करने जा रहा है। इसके तहत कुपोषित बच्चों को पुष्टाहार दिया जाएगा। जिले में कुपोषित बच्चों का पता लगाने के लिए कुछ समय पहले विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों का वजन किया गया था। इसके बाद समाने आए आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि कुशीनगर कुपोषण के खिलाफ जंग में कमजोर पड़ रहा है। जिले के नगर क्षेत्र में 1615 कुपोषित बच्चे मिले हैं, जबकि 624 बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो बहुत ही खराब है। यहां 70 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित हैं, जबकि अति कुपोषित बच्चों की संख्या 24964 है। यह स््थिति तब है जब पांच साल के सभी बच्चों का वजन नहीं किया गया है। आमतौर पर माना जाता है कि नगर क्षेत्र में लोगों का रहन-सहन और खानपान बेहतर होता है, लेकिन वहां भी कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का आंकड़ा दो हजार के पार पहुंच गया है। पडरौना और कसया के शहरी क्षेत्रों में तीन वर्ष तक के 820 कुपोषित और 365 अति कुपोषित बच्चे मिले हैं। तीन से पांच वर्ष की उम्र के बच्चों को देखें तो शहरी क्षेत्रों में 795 बच्चे कुपोषित 259 अति कुपोषित हैं।