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UP: दिव्यांग लव ने दर्द किया साझा,' हमारी आवाज कोई बने, DM ने दिखाई संजीदगी- संभालेंगे खिलाड़ी की बिगड़ी लय

Sat, 06 Dec 2025 02:26 PM IST
रोहित सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर

सार

डीएम महेंद्र सिंह तंवर के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने संजीदगी दिखाई। कहा, मामला संज्ञान में आया है। हम जल्द उक्त खिलाड़ी की मांग के अनुरूप शासन से क्या व्यवस्था कर सकते हैं, वह करेंगे।सामान्य खिलाड़ियों के साथ दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए कार्य करना हमारी प्राथमिकता है।
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खिलाड़ी लव विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता शील्ड के साथ. डीएम महेंद्र सिंह तंवर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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 देश के लिए खेलते हुए क्रिकेट की 22गज की पट्टी पर लव ने अपनी फिरकी गेंदबाजी से बल्लेबाजों का खूब लय बिगाड़ा।भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और जीत दिलाई लेकिन अब वह खुद संघर्ष की पिच पर अकेले हो गए हैं। दिव्यांग क्रिकेटर लव को सुनने वाला कोई नहीं हैं। ऐसे में उसकी आर्थिक लय भी बिगड़ती जा रही है।
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उनकी मूल मांग शासन से उन्हें एक अदद नौकरी की है। उनका कहना है कि एक तरफ ट्राफी जीतने के बाद भारतीय टीम के सामान्य खिलाड़ियों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पैसों के साथ नौकरी भी दे देती है, लेकिन उन्हें वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिला जबकि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों यूपी के सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग जन दिवस पर जब लव से बातचीत किया गया तो उन्होंने अब जनप्रतिनिधियों के इतर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर पर उम्मीद जताई। इसपर तुरंत एक्शन में आए जिलाधिकारी ने उक्त खिलाड़ी से मुलाकात कर जल्द शासन द्वारा त्वरित मदद दिलाने की बात कही।

दिव्यांग भारतीय टीम के पूर्व कप्तान लव आर्थिक लय खोजने के लिए जनप्रतिनिधियों का चक्कर लगा रहा है।आर्थिक झंझावातों से घिरे दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ी और भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान लव वर्मा पहले से ही आर्थिक झंझावातों से जूझ रहे थे, लेकिन दिसम्बर 2024 में जब पिता ने साथ छोड़ दिया तो दुखों का पहाड़ टूट गया।

इधर अमर उजाला की खबर के बाद संजीदा होकर लव की समस्याओं पर आगे आने वाले जिले के जनप्रतिनिधि भी लुप्त हो गए। अब सबने हाथ खड़े कर दिए हैं। लव ने दूरभाष पर अमर उजाला से अपनी दर्द साझा कर कहा, पिता सहारा थे। उनका देहांत हो चुका है। जिंदगी असहज लगने लगी है।

उम्मीद लेकर किसी के पास जाऊं तो आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता। जनप्रतिनिधियों से जो उम्मीदें जगी थी वह अस्त हो चुकी हैं। हमे अब बस मुख्यमंत्री से उम्मीद है। जिलाधिकारी से गुहार लगाते हुए लव ने कहा कि 'हमें डीएम साहब से उम्मीद है कि वो मेरी व्यथा को सुनेंगे'।


 

जिले के तमकुही ब्लॉक के बिहार बुजुर्ग निवासी स्व बाबूलाल वर्मा के पुत्र दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ी लव वर्मा की कहानी खुशहाल और आलीशान होने के बजाय दुखों से घिरती चली जा रही है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय दिव्यांग टीम के लिए 2014 में लव वर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ जबसे पदार्पण किया पीछे मुड़ के नहीं देखा और एक से बढ़ाकर एक अच्छे प्रदर्शन करते चले गए।

2015 में एशिया कप के लिए भारतीय टीम के उपकप्तान बन जलवा बिखेरा और अपनी स्पिन गेंदबाजी से बल्लेबाजों को छकाया था। 2019 में लव को कप्तान भी बनाया गया था। लव के अच्छे प्रदर्शन से उन्हें मौके और प्रमोशन तो मिलते रहे, लेकिन आर्थिक स्थिति नहीं सुधर सकी।

पिता बाबूलाल वर्मा अनपरा सोनभद्र में टेक्नीशियन थे तो लव ने पिता के आर्थिक सहायता के लिए वहां छोटे बच्चों की कोचिंग शुरू की और बड़े स्तर के टूर्नामेंट कराने लगे। पिता दो वर्षों से सेवानिवृत होकर घर रह रहे थे। इसी बीच दिसंबर 2024 में चल बसे। लव टूर्नामेंट से पैसे एकत्रित करते है।

किराए के मकान में रहकर दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे लव खेल कोटे से एक अदद नौकरी की दुहाई कर रहे है । आर्थिक झंझावातों और जनप्रतिनिधियों सहित सरकारी उपेक्षा से आहत लव पूरी तरह सदमे में है।उससे दूरभाष पर बातचीत का प्रयास किया गया तो उसने बताया कि एक पिता सहारा थे वह भी खत्म हो गया।

जनप्रतिनिधियो ने आश्वासन की पराकाष्ठा पार कर दी है।हम उन्हें किसी से उम्मीद नहीं है।दरअसल,05 अगस्त 2024 को अमर उजाला में ' दूसरों को फिरकी पर नचाता है,सिस्टम के सामने खुद नाच गया..' शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी जिसके बाद जिले के विधायकों ने पहल किया था और लव से मुलाकात की थी।

इधर सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने भी खेल निदेशक तक उनकी मांग को पहुंचाने का वादा किया लेकिन एक साल होने को है और उसके बाद कुछ नहीं हुआ।लव कहते हैं कि एक तरह हमारे ही जिले में खिलाड़ियों को नौकरी दी जा रही है।हम शरीर से दिव्यांग है तो हमे ये सुविधा आखिर क्यों नहीं दी जाती।
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मामला संज्ञान में आया है। हम जल्द उक्त खिलाड़ी की मांग के अनुरूप शासन से क्या व्यवस्था कर सकते हैं वह करेंगे।सामान्य खिलाड़ियों के साथ दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए कार्य करना हमारी प्राथमिकता है: महेंद्र सिंह तंवर,जिलाधिकारी,कुशीनगर

 
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