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कसया सिपाही कांड: आरोपी और ढाबा संचालक के पुराने संपर्क की हो रही जांच

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शुरुआती जांच में आरोपी और ढाबा संचालक के पहले से संपर्क होने के मिले संकेत
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- कॉल डिटेल और लोकेशन भी खंगाल रही पुलिस, युवती का जल्द होगा कोर्ट में बयान
- ढाबा संचालक और युवतियों के आवास के आसपास रहने वालों के दर्ज होंगे बयान

कुशीनगर। बेतियाहाता में रहने वाले ढाबा संचालक से कथित अनुचित मांग करने और विरोध करने पर ब्यूटी पार्लर संचालिका की बहन के अपहरण के मामले में जेल भेजे गए दोनों सिपाहियों के खिलाफ पुलिस ने विवेचना तेज कर दी है। प्रत्यक्ष, परिस्थितिजन्य और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में पुलिस जुटी है। साथ ही आरोपियों व ढाबा संचालक के पुराने संपर्कों की भी जांच हो रही है।

विवेचना के दौरान पुलिस ढाबा संचालक और पीड़ित पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों बारे में साक्ष्य जुटा रही है। साथ ही घटनास्थल और युवतियों के आवास के आसपास रहने वाले लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे, ताकि मामले के हर पहलू की पुष्टि की जा सके।
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जांच में शुरुआती तौर पर यह संकेत मिले हैं कि मुख्य आरोपी सिपाही उमाशंकर यादव का ढाबा संचालक से पहले से संपर्क था। इसकी पुष्टि के लिए पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि पीड़िता का कोर्ट में बयान दर्ज होने के बाद विवेचना और तेज होगी। संभावना है कि एक-दो दिनों के भीतर उसका बयान न्यायालय में दर्ज कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। कसया के सीओ डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और जल्द ही पीड़िता का न्यायालय में बयान दर्ज कराया जाएगा।
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यह था मामला

बेतियाहाता निवासी ढाबा संचालक पप्पू सिंह ने आरोप लगाया कि कसया थाने पर तैनात सिपाही उमाशंकर यादव ने उससे अनुचित मांग की। मना करने पर देर रात साथी सिपाही महेंद्र यादव के साथ आवास पहुंच कर पिटाई की। बीच-बचाव करने आईं पड़ोस की दो सगी बहनों में से एक को अगवा कर अपने साथ गोरखपुर ले गए। करीब साढ़े तीन घंटे बाद लाकर उसके आवास पर छोड़ा। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दोनों सिपाहियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दोनों की बर्खास्तगी की संस्तुति भी की गई है।
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