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Kushinagar News: जंक फूड से बढ़ रहा मोटापा, घट रही याददाश्त

Fri, 21 Aug 2026 02:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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कसया। पिज्जा, बर्गर, चाउमीन और अन्य तले-भुने खाद्य पदार्थों का बढ़ता चलन बच्चों और युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा है। कसया सीएचसी में जांच के दौरान रोजाना 50 से अधिक ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो गलत खानपान और खराब जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। इनमें मोटापा समेत उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य बीमारियों के मरीज शामिल हैं। जांच में करीब 10 प्रतिशत मरीजों में यकृत में अतिरिक्त वसा जमा होने की पुष्टि हो रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. स्तुति शुक्ला के अनुसार, प्रतिदिन 25 से 30 बच्चे ऐसे ओपीडी में आ रहे हैं, जो जंक फूड का अधिक सेवन करते हैं। जंक फूड का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों को मोटापे की ओर धकेल रहा है। साथ ही उनकी याददाश्त भी कमजोर हो सकती है। कई मरीजों को लंबे समय तक दवा के साथ खानपान और जीवनशैली में बदलाव की सलाह देनी पड़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली और खानपान की गलत आदतें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बन रही हैं।
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कम उम्र में बढ़ रहा मोटापा

फिजिशियन डॉ. आशुतोष पांडेय बताते हैं कि शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, नींद की कमी और तनाव बच्चों व युवाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। पहले उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां बढ़ती उम्र में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब 30 से 45 वर्ष की उम्र में भी इनके मरीज सामने आ रहे हैं। जंक फूड में नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक होती है। इसके नियमित सेवन से मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, रक्त में वसा की अधिकता और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
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पौष्टिक आहार लेने की सलाह

सीएचसी प्रभारी डॉ. मार्कण्डेय चतुर्वेदी ने पौष्टिक आहार का सेवन करने और बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने अंकुरित अनाज और हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन में शामिल करने, जंक फूड व फास्ट फूड का सेवन बंद करने की सलाह दी। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और स्वच्छ पानी का ही इस्तेमाल करने के साथ योग व व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के दवा नहीं लेने की भी सलाह दी गई है। चिकित्सकों के अनुसार खानपान और जीवनशैली में सुधार कर इन बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। गंभीर स्थिति में यकृत को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
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