पडरौना। जिला पंचायत की तरफ से निकाले गए टेंडर को लेकर मंगलवार को माहौल गर्म रहा। नाराज सदस्यों ने जिला पंचायत गेट पर धरना दिया। सदस्यों ने अध्यक्ष और अपर मुख्य अधिकारी पर मनमानी का आरोप लगाया। एडीएम ने 10 दिन में कार्रवाई का भरोसा दिलाकर आंदोलन खत्म कराया।
पिछले महीने जिला पंचायत की तरफ से 33 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लिए टेंडर निकाला गया। सदस्य विनय प्रकाश गौंड़ समेत कुछ अन्य लोगों ने इस पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने डीएम को निर्देशित करते हुए आठ सप्ताह में निस्तारण का आदेश दे रखा है। बीते एक जुलाई को सदस्यों ने डीएम से मिलकर टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी। सोमवार को फिर इन सदस्यों ने डीएम और एएमओ को पत्र देकर टेंडर प्रक्रिया रोकने की मांग दोहराई थी।
मंगलवार को पूर्व विधायक शंभू चौधरी, जिला पंचायत सदस्य विनय प्रकाश गौंड़, रामअशीष, नीतिश कुमार यादव समेत कई लोगों ने जिला पंचायत कार्यालय के गेट पर धरना शुरू कर दिया। धरना दे रहे लोगों का कहना था कि जिला पंचायत अध्यक्ष और अपर मुख्य अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। टेंडर में न तो जिला पंचायत सदस्यों के प्रस्ताव को ध्यान में रखा गया है और न ही कार्य की जरूरत को। यहां तक कि जिला पंचायत ने उपलब्ध बजट का भी ख्याल नहीं रखा है। दोपहर बाद आंदोलन स्थल पर पहुंचे एडीएम रामकेवल तिवारी ने आंदोलनकारियों से बात की। उन्होंने 10 दिन के अंदर इस मामले में कार्रवाई का भरोसा दिलाकर आंदोलन खत्म कराया। इसके चलते बहुत देर तक जिला पंचायत गेट पर गहमागहमी बनी रही।
जिला पंचायत की तरफ से 33 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लिए निकाले गए टेंडर और इसे लेकर जिला पंचायत सदस्यों की तरफ से मंगलवार को कार्यालय के बाहर दिए गए धरना के संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश राणा का कहना था कि आरोप निराधार है। टेंडर नियमानुसार निकाला गया है। जो जिला पंचायत सदस्य अनशन और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्होंने खुद टेंडर फार्म खरीदा है। यदि उन्हें कमी दिख रही है तो टेंडर के लिए फार्म ही क्यों लिया। यह सब राजनीतिक विद्वेष के कारण और विकास कार्य रोकने के लिए किया जा रहा है।