- नगर के उदित नारायण पीजी कॉलेज में अन्य विषयों के सापेक्ष संस्कृत और अर्थशास्त्र विषय में नामांकन है कम
पडरौना। संस्कृति भाषा की पढ़ाई के लिए छात्रों में रुचि निरंतर घट रही है। जबकि समाज शास्त्र, नागरिक शास्त्र, भूगोल, इतिहास जैसे विषयों में छात्रों की संख्या अधिक है। यह संख्या घटने का मुख्य वजह बच्चे ऐसी पढ़ाई करना चाहते हैं, जिससे उन्हें पढ़ाई के बाद नौकरी में काम आए, लेकिन इन विषय में नौकरियों की रिक्तियां कम निकलती हैंं, जिसके चलते विद्यार्थी इसमें रूचि नहीं दिखा रहे हैं।
पडरौना उदित नारायण पीजी कॉलेज में स्नातक में कला वर्ग से कुल दस विषयों की पढ़ाई होती है। इसमें हिंदी के पांच, राजनीति शास्त्र के तीन, इतिहास के एक, शिक्षा शास्त्र के तीन, संस्कृत के एक, अर्थशास्त्र के एक, शारीरिक शिक्षा के एक, समाज शास्त्र के आठ, भूगोल के तीन और अंग्रेजी विषय के एक शिक्षक का पद सृजित है। इसीतरह स्नातक के विज्ञान वर्ग में रसायन शास्त्र के चार, भौतिकी शास्त्र के तीन, जंतु विज्ञान के दो, वनस्पति विज्ञान के दो और गणित विषय के एक शिक्षक का पद सृजित है। इन सभी विषयों में सृजित पदों के सापेक्ष शिक्षकों की तैनाती है। विश्वविद्यालयीय नियमों के अनुसार एक शिक्षक पर 60 विद्यार्थियों के लिए सीट निर्धारित होता है। यानी जिन विषय में शिक्षकों का तीन पद सृजित है, उन विषय में 180 विद्यार्थियों का नामांकन होता है। इसके अलावा छात्र संख्या बढ़ने पर कॉलेज की मांग पर विश्वविद्यालय सभी विषयों में 20 प्रतिशत सीट बढ़ा सकता है। विश्वविद्यालय की तरफ से सीट बढ़ने की अनुमति मिलने पर प्रतिक्षारत विद्यार्थियों का बढ़ी सीट के सापेक्ष नामांकन कर लिया जाता है। लेकिन महाविद्याल मेें अन्य विषयों में सीट के सापेक्ष नामांकन फुल हो गया है। लेकिन संस्कृत विषय में अभी तक केवल 26 विद्यार्थियों ने ही अपना नामांकन कराया है। पिछले वर्ष इस विषय में केवल चार छात्रों ने ही नामांकन कराया था। बीएस प्रथम वर्ष की छात्रा नंदनी व ज्योति ने बताया कि संस्कृत भाषा जरूर भारत की सबसे पुरातन भाषा है, लेकिन इसकी पढ़ाई करने से आगे नौकरी कम मिलती है। जबकि समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल, शिक्षा शास्त्र जैसे विषयों से स्नातक करने के बाद आगे कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलती है। बीए द्वितीय वर्ष के छात्र शिवम सिंह, अभिषेक मल्ल, दीपक पांडेय, रामेश्वर कुशवाहा ने बताया कि स्नातक में केवल तीन विषय ही पड़ना है। हिन्दी के साथ संस्कृत कंबीनेशन जरूर होता है, लेकिन तीसरा विषय कौन लिया जाय, जो आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षा में मदद मिल सके। इसलिए विद्यार्थियों के पास विकल्प कम मिलता है। इसके चलते संस्कृत पढ़ने से कतराते हैं।
समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल और अर्थशास्त्र ऐसे विषय है, जिससे तैयारी यदि ठीक से हो जाय तो विद्यार्थी आगे चलकर प्रशासनिक सेवाओं की भर्ती की तैयारी कर सकता है। इसके अलावा बैंक, रेलवे समेत अन्य परीक्षाओं की तैयारियों में छात्र-छात्राओं को मदद मिलती है। इसलिए इन विषयों की पढ़ाई करने के लिए छात्र-छात्राएं रूचि दिखाते हैं।
- डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी, समाजशास्त्र।
इंटर करने के बाद विद्यार्थी ऐसी शिक्षा चाह रहे हैं, जिससे उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद तत्काल नौकरी मिल सके। इसके चलते बच्चों में टेक्नीकल विषयों की पढ़ाई में रूचि बढ़ी है। संस्कृत विषय से जुड़ी भर्तियां अन्य विषयों के सापेक्ष बहुत कम आती है। इसलिए छात्र इसमें रूचि कम दिखा रहे हैं। लेकिन इस वर्ष नामांकन कराने आए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित कर उन्हें संस्कृत पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया है। कॉलेज में संस्कृत दिवस भी मनाया गया है। इसमें शामिल छात्र-छात्राएं बड़ी ही प्रभावित हुए थे।
- प्रोफेसर ममता मणि त्रिपाठी, प्राचार्य, उदित नारायण पीजी कॉलेज, पडरौना