गंडक का पानी खेतों में पहुंचा।
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गंडक के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से पिपराघाट में एक बड़े भू भाग में बोई गई फसलों को नुकसान होने का खतरा मंडराने लगा है। जल स्तर में वृद्धि से अब तक लगभग सैकड़ों हेक्टेअर गन्ना, मक्का और धान की फसल जलमग्न हो चुकी है। किसानों का कहना है कि जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला आगे भी जारी रहा तो फसलें बर्बाद होने से बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।
पिपराघाट की करीब बारह हजार आबादी के जीवन निर्वाह का मुख्य साधन कृषि है। खेती करके ही लोग अपना और परिवार का भरण पोषण करते हैं। यही नहीं, गन्ने की खेती से ही किसान अपने बच्चों के पढ़ाने सहित अन्य जरूरतें पूरी करते हैं। लेकिन किसानों की फसलों को गंडक नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से खतरा मंडराने लगा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है।
तवकल टोला, चौकी टोला, मुसहरी टोला, मोतीराय टोला, दहारी टोला, नरवाजोत, इमिलिया टोला, जोगनी टोला, बुटनटोला सहित अन्य कई गांवों में एक बडे़ भू-भाग पर बोई गई गन्ना, मक्का और धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। खेतों में पानी भरने से फसलें बर्बाद होने की आशंका पैदा हो गई है। गांव के कैलाश सिंह व शर्मा यादव का कहना है कि यदि बाढ़ से बचाने से संबंधी कार्य 15 जून से पहले पूरे कर लिए गए होते तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती।
गांव के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सरल शर्मा व अशोक सिंह का कहना है कि वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज अभी एक लाख क्यूसेक के आसपास चल रहा है। अगर नदी में डिस्चार्ज बढ़ा तो फसलों को बर्बाद होने से बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। फसलें जलमग्न होने जाने पर गांव के सुरेन्द्र, महातम, गोपी, नत्थू, पुजारी आदि ने चिंता जताने के साथ ही तहसील प्रशासन बचाव के लिए आवश्यक उपाय किए जाने की मांग की है। इस संबंध में तहसीलदार रामसुधार का कहना है कि तहसील प्रशासन किसी भी चुनौती से निपटने की तैयारी में जुट गया है।