पडरौना/तमकुहीरोड। मानसून दस्तक देने वाला है, लेकिन बाढ़ बचाव के कार्य अधूरे पड़े हैं। इससे तमकुहीरोड क्षेत्र में एपी बांध और नरवाजोत बांध के किनारे बसे गांवों में दहशत है। बांध के कई हिस्सों में स्लोप, पैच और रिवेटमेंट का काम अधूरा पड़ा है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ते ही खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। नोनिया पट्टी, बाघाचौर जैसे इलाकों में तो दो साल से कोई काम ही नहीं हुआ। 20 हजार से अधिक की आबादी बाढ़-कटान के डर में जी रही है। हालांकि बचाव कार्य के लिए बाढ़ खंड को 15 दिन का समय और दिया गया है, लेकिन कार्य की गति धीमी होने से कार्य पूरा कराना किसी चुनौती से कम नहीं है।
एपी बांध और नरवाजोत बांध पर चल रहे बाढ़ बचाव कार्यों की धीमी रफ्तार ने चिंता बढ़ा दी है। बांधों की सुरक्षा के लिए 32.71 करोड़ की तीन परियोजनाओं में कहीं आधा तो कहीं आधे से थोड़ा अधिक काम हो पाया है। बाढ़ खंड सेवरही की तरफ से नरवाजोत बांध की दो और एपी बांध पर एक परियोजना चल रही है। 11.32 करोड़ की पहली परियोजना में नरवाजोत बांध पर किमी 1.700 पर स्पर के नोज भाग के साथ ट्रांजिट एप्रन, किमी 1.950 से 2.100 के बीच रिवेटमेंट पुनर्स्थापना और किमी 0.000 से 0.100 के बीच रिवेटमेंट व तीन पंक्ति में परक्यूपाइन का निर्माण होना है।
11.66 करोड़ की दूसरी परियोजना में नरवाजोत बांध पर किमी 0.525 से 0.825 और किमी 0.825 से 1.000 के बीच रिवेटमेंट पुनर्स्थापना तथा किमी 0.525 से 1.000 के बीच तीन पंक्ति में परक्यूपाइन बनाना है। 9.72 करोड़ की तीसरी परियोजना में एपी बांध के जवही दयाल में किमी 3.500 से 4.000 के बीच रिवेटमेंट पुनर्स्थापना व तीन पंक्ति में परक्यूपाइन का काम होना है। कई स्थानों पर रिवेटमेंट का काम शुरू ही नहीं हुआ है।
कार्य स्थल पर जेई रमेशधर दुबे, सुनील यादव, विनोद शर्मा, अमर श्रीवास्तव, अभिजित सिंह, रामचंद्र प्रसाद, अजीत सिंह की टीम लगी है, लेकिन काम की गति धीमी है। बांध किनारे बसे मथुरा सिंह, पारस सिंह, दिनेश जायसवाल, पारस निषाद, शैलेंद्र चौहान, गौतम सिंह का कहना है कि हर साल बाढ़-कटान झेलते हैं। तटबंध कई जगह जर्जर हैं। अगर काम पूरा होने से पहले वाल्मीकिनगर बैराज से पानी छोड़ा गया तो बांध टूट सकता है और 20 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे।