उतरावल में कथा कहते आचार्य धरणीधर महाराज
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संतकबीरनगर। विकास खंड बघौली के अंतर्गत कोल्हुआ लकड़ा उतरावल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस अयोध्या धाम से आए कथावाचक डाॅ. धरणीधर ने कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने रोज कई पाप होते हैं। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एकमात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। उन्होंने जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है। आगे कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्याग कर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करना चाहिए। कथावाचक ने बुधवार को भागवत कथा के दौरान कपिल चरित्र, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों पर प्रवचन दिए।
उन्हाेंने कहा कि भगवान के नाममात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया। कथा के दौरान मुख्य यजमान राधेश्याम राय, लक्ष्मी, देवचंंद्र पांडेय, हीरा पांडेय, फूलचंद, टिल्लू राय, बैजनाथ राय, राकेश राय, शंभुनाथ राय, केशवनाथ राय आदि मौजूद रहे।