पिपरा कनक। इसे तमकुहीराज तहसील प्रशासन की दरियादिली कही जाए या घोर लापरवाही। एक ही गांव में 55 मृत किसानों के नाम से राहत चेक जारी कर दिया गया है। जिनके नाम से चेक जारी हुए हैं, उनके भू-अभिलेखों पर वारिसों के नाम पांच-छह वर्ष पूर्व ही दर्ज हो चुके हैं।
भेद तब खुला, जब चेक लेकर लेखपाल गांव में पहुंचे। लेकिन इसी गांव में कई ऐसे लोग भी लोग हैं, जो मुआवजा राशि के वाजिब हकदार थे, फिर भी उनकी अनदेखी कर दी गई। गांव के लोग तहसील प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।
पिछले वर्ष ओलावृष्टि से बर्बाद हुई किसानों की गेहूं की फसल का मुआवजा देने के लिए तमकुहीराज तहसील प्रशासन ने सर्वे कराने के बाद मुआवजा राशि का प्रस्ताव भेजा था। प्रभावित किसानों को देने के लिए मुआवजा राशि भी आ गई। इस तहसील क्षेत्र के बिहार खुर्द (समऊर बाजार) के 795 किसानों की लिस्ट और चेक लेकर चार दिन पहले लेखपाल गांव में पहुंचे।
उनमें से 55 किसानों के ऐसे नाम थे, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी हैै। भू अभिलेखों में उनके वारिसों के नाम दर्ज हो चुके हैं। चेक वितरित होने के बाद से ही गांव के लोग हैरान हैं।
गांव के सत्यानंद मिश्रा का कहना था कि एक तो जरूरतमंद और आपदा प्रभावितों का नाम मुआवजा सूची में शामिल नहीं किया गया, दूसरे रुपये के लालच में मृतकों का नाम सूची में शामिल कर दिया गया। यदि तहसील प्रशासन ने एक सप्ताह के अंदर गड़बड़ी ठीक कर आपदा प्रभावितों किसानों को चेक नहीं दिया तो गांववालों के साथ प्रदर्शन करेंगे।