फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: 18 साल कंपाउंडर... फिर ‘डॉक्टर’ बन गया अरविंद

विज्ञापन
विज्ञापन
रामकोला। प्रसव के बाद महिला की मौत के मामले में सील हो चुके कस्बे के गीतांजलि हॉस्पिटल का संचालक अरविंद शर्मा करीब 18 साल पहले पडरौना के एक निजी डॉक्टर की क्लीनिक पर कंपाउंडर का काम करता था। अचानक उसकी आर्थिक हालत बदली और डॉक्टर के नाम से चर्चित हो गया। अपनी पत्नी की डिग्री पर अस्पताल का पंजीकरण कराया था। प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि अरविंद डाक्टर नहीं अस्पताल का संचालक है और इसकी पत्नी की डिग्री भी संदिग्ध है। जांच में घेरे में आए दंपती डिग्री गायब होने की प्राथमिकी दर्ज कराने की फिराक में थे। रामकोला थाने में गुमशुदगी दर्ज नहीं हुई तो देवरिया में जाकर लूट की कहानी रची पर वह भी दांव नहीं चला।
विज्ञापन

मालूम हो कि रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना गांव निवासी पूनम देवी ने ऑपरेशन के बाद 21 नवंबर की रात को जुड़वे बच्चे को जन्म दिया। 22 नवंबर को उसकी मौत हो गई। इस मामले में पूनम के देवर की तहरीर पर रामकोला पुलिस ने ने अरविंद शर्मा पर प्राथमिकी दर्ज की है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू की तो अस्पताल को लेकर कदम-कदम पर गड़बड़ी मिली।
पता चला कि जिस डॉक्टर के नाम से रजिस्ट्रेशन था वह ऑपरेशन के दिन हॉस्पिटल आया ही नहीं था। डॉ. विकास मंडलोई जांच टीम के सामने आए और प्रसूता का ऑपरेशन करने की बात स्वीकार की। स्वास्थ्य विभाग की जांच में अरविंद की पत्नी और डॉ. विकास मंडलोई की डिग्री संदिग्ध मिली। संदिग्ध डिग्री होने पर डीएम के आदेश पर हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया। फर्जीवाड़े से बचने के लिए आरोपी अरविंद शर्मा और इसकी पत्नी देवरिया जिले के तरकुलवा थाना क्षेत्र में जाकर तीन दिन पूर्व लूट की साजिश रची लेकिन पुलिस की जांच में लूट की वारदात फर्जी निकली। थानाध्यक्ष धनवीर सिंह ने कहा कि अस्पताल में जिस दिन महिला की मौत हुई थी। उस दिन जिस डॉक्टर के इलाज करने की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दी है। उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। साक्ष्य के आधार पर विवेचना की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें