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आधी आबादी ने फिर किया चूल्हे की तरफ रुख

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आधी आबादी ने फिर किया चूल्हे की तरफ रुख
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गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। महिलाओं को धुएं से निजात दिलाने को उज्ज्वला योजना से दिए गए रसोई गैस सिलिंडर और चूल्हे की आग महंगाई में ठंडी पड़ गई है। गरीब परिवारों को निशुल्क कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन अब रसोई गैस के दाम बढ़ने से लाभार्थी इन्हें भरा नहीं पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत गरीब महिलाओं को सरकार की ओर से निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन व चूल्हा दिया गया था, जिससे गरीब महिलाएं धुएं और उससे उत्पन्न बीमारियों से निजात पा सकें। सरकार की इस योजना से महिलाएं काफी उत्साहित थीं, लेकिन धीरे-धीरे रसोई गैस के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि से गृहिणियों की खुशी कम होने लगी। परिणाम स्वरूप महिलाएं फिर से चूल्हा पर खाना बनाने को विवश हैं।
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यह महज दुदही विकास खंड के दोघरा गांव के मुसहरों की कहानी नहीं, बल्कि क्षेत्र के कमोबेश हर गांव की यही स्थिति है। कोरोना काल के चलते मजदूर तबके के लोगों व मुसहरों की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है, ऐसे घरों में सिलिंडर भरने के लिए 915 रुपये की व्यवस्था कर पाना मुश्किल है। नतीजतन उज्ज्वला योजना के सिलिंडर-चूल्हे घर के कोने में धूल फांक रहे हैं। पिछले वर्ष सरकार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तीन माह तक मुफ्त में गैस सिलिंडर दिया था, लेकिन उससे हालात बदल न सका और फिर गरीब महिलाएं लकड़ी व पुआल पर ही घर का भोजन बना रही हैं।
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लीलवा देवी ने कहा कि मुफ्त का गैस सिलिंडर सरकार ने तो दे दिया, लेकिन क्या फायदा। रसोई गैस इतना महंगा कर दिया कि उस भरवाना गरीबों के बस का नहीं है। गांव में कामकाज बंद है। किसी तरह भरण-पोषण हो रहा है। तेरसे ने कहा कि लकड़ियों से चूल्हे पर खाना बनाती हूं। रसोई गैस सिलिंडर महंगा हो गया है। मजदूरी से घर का खर्च किसी तरह चल पाता है। गांव में कभी-कभी ही काम मिलता है। इतनी महंगाई असहनीय है। जब फिर पुराने दिन लाने थे, तो गैस सिलिंडर के सपने क्यों दिखाए। चंदा देवी ने कहा कि गांव में अब काम बहुत कम मिलता है। कभी-कभी काम मिल जाता है। जो थोड़े-बहुत रुपये मिलता हैं, वह भी तेल और राशन में खत्म हो जाता है। महंगाई की इस मार ने जीना दूभर कर दिया है। गरीबों को लुभाने के लिए सिलिंडर तो दे दिया, लेकिन गैस इतना महंगा कर दिया कि भरवा नहीं पा रहे हैं। ऐसे में चूल्हा ही सहारा है। लचिया देवी ने कहा कि बढ़ते दाम के लिए सरकार पूरी तरह से दोषी है। पुआल और कहीं-कहीं से बीने हुए लकड़ी से चूल्हे पर किसी तरह खाना बनाती हूं। सिलेंडर इतना महंगा हो गया कि घर के कोने में पड़ा है।
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