नेबुआ नौरंगिया। ब्लॉक के ग्रामसभा ढोलहा के गुलहरिया टोला के लोग बच्चों की सेहत को लेकर दहशत में हैं। झोलाछाप के चक्कर में फंसकर परिजन दस दिनों से इलाज कराते रहे। हालत गंभीर होने पर दो बहनों और एक चचेरे भाई की मौत हो गई।
आरबीएसके की टीम गांव में पहुंची थी। टीम ने कृष को सीएचसी पर इलाज के लिए लेकर चलने को कहा, लेकिन परिजन इसे गंभीरता से नहीं लिए। अब परिजनों को पछतावा हो रहा है कि अगर आरबीएसके टीम की बात मान ली होती तो कृष की जान बच जाती।
गांव में पिंटू गौड़ का घर इन दिनों मातम में डूबा है। कभी आंगन में खेलने वाली मंजू, खुशी और कृष की खिलखिलाती आवाजें अब सिर्फ यादों में बची हैं। पिंटू की सात वर्षीय बेटी मंजू को एक सप्ताह से तेज बुखार था। गांव के ही झोलाछाप डॉक्टर ने दवाएं दीं, लेकिन हालत बिगड़ती गई, जब परिवार मेडिकल कॉलेज पहुंचा, तब तक देर हो चुकी थी। बुधवार देर रात उसने दम तोड़ दिया।
मंजू की मौत से अभी उबरे नहीं थे कि उसकी तीन वर्षीय बहन खुशी की तबीयत बिगड़ गई। मेडिकल कॉलेज कुशीनगर से बीआरडी गोरखपुर लेकर पहुंचे। इलाज के दौरान शुक्रवार को भोर में उसकी भी मौत हो गई। इधर पिंटू के बड़े भाई दशरथ के पांच वर्षीय मासूम कृष की तबीयत भी तेज बुखार से बिगड़ गई। दोनों बहनों की मौत के बाद गांव में आरबीएसके टीम पहुंची और दवा देने के बाद कृष को सीएचसी पर लेकर जाने के लिए कहा।
परिजन सीएचसी न ले जाकर झोलाछाप से इलाज कराते रहे। कृष की तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन कुशीनगर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर लेकर जाते समय उसकी मौत हो गई। एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
मां निशा का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों को अफसोस है कि अगर शुरुआत में ही सरकारी डॉक्टरों के पास चले गए होते तो शायद आज यह दिन न देखना पड़ता। गांव में भी यही चर्चा है कि झोलाछाप के सहारे इलाज कराना जानलेवा साबित हुआ।
सीएचसी प्रभारी डॉ. रंजन कुमार मौर्य ने भी लोगों से अपील की है कि बुखार समेत किसी भी बीमारी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे।