पडरौना। राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर बुधवार देर रात चले अभियान में टीम ने अलग-अलग थाना क्षेत्र में बिहार से यूपी लाए जा रहे स्क्रैप लदे सात ट्रक को कब्जे में लिया। इसमें स्टेट जीएसटी (वस्तु एवं कर) चोरी का खुलासा हुआ है।
इसी क्षेत्र में तीन दिन पूर्व भी हाईवे पर एसडीएम के नेतृत्व में कर चोरी के मामले में पांच ट्रक कब्जे में लिए गए थे। इन दोनों मामले में फर्जी बिल के सहारे स्क्रैप को यूपी के पश्चिमी इलाकों के अलावा अन्य प्रांत में खपाने की बात सामने आई है।
बिहार से लेकर पूर्वांचल के गोरखपुर और पश्चिमी यूपी के इलाके होते हुए पंजाब, उत्तराखंड में जीएसटी चोरी कर धंधेबाज ट्रक से स्क्रैप भेजते हैं। मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा आदि बिहार के इलाकों से बड़ी संख्या में गोपालगंज होते हुए बिना ई-वे बिल या नकली फर्म दिखाकर फर्जी ई-वे बिल के सहारे लोहे के स्क्रैप की गाड़ियां कुशीनगर में प्रवेश करती हैं। इन ट्रकों से गोरखपुर, अयोध्या, लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर के अलावा पंजाब और उत्तराखंड में स्थित मंडियों में स्क्रैप पहुंचाया जाता है। इस बीच बिहार में बैठे धंधेबाज सख्त कानून वाले जिलों में सीमा पार कराने वाले धंधेबाजों से संपर्क करते हैं, जहां उनकी गाड़ियों को सीमा पार कराया जाता है।
इसके अलावा स्क्रैप में कर चोरी की खबर के बाद कई ऐसे धंधेबाजों की सक्रियता जिले में रही है जो खुद को सेल्स टैक्स, जीएसटी का अधिकारी बताकर टैक्स चोरी पकड़ते हुए ट्रकों से वसूली करते नजर आ चुके हैं। पिछले वर्ष कुशीनगर पुलिस ने ऐसे गुर्गों को गिरफ्तार भी किया था। इसके अलावा पिछले पांच दिनों में राष्ट्रीय राजमार्ग पर अलग अलग थाना क्षेत्र में जीएसटी चोरी के मामले में हुई कार्रवाई से जहां धंधेबाजों में खौफ है। जिले के रास्ते लगातार हो रही जीएसटी चोरी को लेकर कई सफेदपोशों के नाम भी सामने आ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि उक्त सफेदपोश स्क्रैप लदे ट्रकों को सीमा पार कराने की जिम्मेदारी लेते हैं, जिसमें कुछ विभागीय लोगों की भी भूमिका होती है।
सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फरपुर से लेकर दरभंगा और बिहार के कई ऐसे धंधेबाज सक्रिय हैं जो स्क्रैप कारोबारी भी है। पंजाब तक ही स्क्रैप के कारोबार में बिल की हेराफेरी कर टैक्स चोरी के मामले में पिछले वर्ष मुजफ्फरपुर में एक कारोबारी की गिरफ्तारी हुई थी। इसके अलावा कुशीनगर के रास्ते गई स्क्रैप को पिछले वर्ष गोरखपुर में पकड़ा गया था। वहां भी टैक्स चोरी के मामले में बिहार के एक माफिया का नाम आया था। इन सभी धंधेबाजों को सीमा पार कराकर अन्य जिले तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी कुछ स्थानीय सक्रिय धंधेबाज लेते हैं जो उक्त ट्रकों और मालिकों से खुद को जीएसटी अधिकारी बताकर वसूली करते हैं। ऐसे धंधेबाज पिछले वर्ष राष्ट्रीय राजमार्ग से पकड़े गए थे। बताया जा रहा है कि छूटने के बाद उन्होंने अपनी पुरानी गतिविधियों में लिप्त होकर फिर से वसूली को अंजाम देना शुरू कर दिया है।
जीएसटी अधिकारी बन वसूली वाले गिरोह का भी हो चुका है पर्दाफाश : जिले में बिहार से आ रही गाड़ियों से चोरी कर स्क्रैप को अन्य प्रांत में ले जाया जाता है, यह किसी से छिपा नहीं है। इसी का फायदा उठाते हुए कई धंधेबाजों ने लंबे समय से वसूली गैंग तैयार कर रखा है जो ट्रकों से खुद को जीएसटी का अधिकारी बन वसूली करते हैं। इन दिनों हाईवे पर उक्त गिरोह सक्रिय है। आठ जुलाई 2024 को कुशीनगर पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया था जो फोरलेन व हाईवे पर माल की ढुलाई करने वाले ट्रकों से जीएसटी अधिकारी बनकर रकम वसूलता था। इसके लिए गिरोह के सदस्य जीएसटी के कागजात में कमी का बहाने बनाते थे। इस गिरोह ने अब कई ट्रकों से लाखों रुपये की ठगी की थी। गिरोह के नौ सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
जीएसटी वसूली में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल : जीएसटी चोरी और उसमें वसूली का पूरा खेल बिहार से पश्चिमी प्रांत तक फैला है। इसमें जिले के शातिर सफेदपोश धंधेबाजों के साथ पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है।सूत्र बताते हैं कि तरयासुजान के आसपास जब बिहार से ऐसे ट्रक एंट्री करते हैं तो शातिर सक्रिय हो जाते हैं और वसूली की रकम थानों तक पहुंचती है। नवंबर 2024 में एनएच-28 पर सक्रिय जीएसटी गिरोह के सदस्यों से आठ हजार रुपये की मांग करते हुए तमकुहीराज के सिपाही मनीष यादव का ऑडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद सिपाही को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया था।सि पाही ने वसूली गिरोह के तीन सदस्यों का नाम ऑडियो में लिया था।
उसकी बातचीत जीएसटी अधिकारी बनकर हाईवे पर वसूली करने वाले गिरोह के एक सदस्य के बीच हुई थी। उक्त वीडियो में वह दारोगा का करीबी भी बता रहा था। ऐसे में उस समय भी इसको लेकर सवाल उठा था कि क्या महज एक सिपाही की भूमिका इस पूरे खेल में है या थानेदारों के शह पर पूरा खेल संचालित हो रहा है।