मंसाछापर। क्षेत्र के खजुरिया गांव में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवें दिन श्रीकृष्ण की बाल लीला की कथा सुनाई गई। कथा व्यास आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगांई ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य दिव्य संदेश देता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान मथुरा में जन्मे, बीच में यमुना रूपी भक्ति बहती है। गोकुल में उनका लालन-पालन यशोदा माता ने किया। उन्होंने कहा कि मथुरा शरीर का प्रतीक है, गोकुल हृदय का और यमुना भक्ति का।
जब भक्ति रूपी यमुना प्रवाहित होती है, तभी भगवान शरीर रूपी मथुरा से हृदय रूपी गोकुल में विराजमान होते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गूढ़ ज्ञान का संदेश देती हैं उनमें प्रेम, समर्पण और धर्म का सार छिपा है। कथा के दौरान उपस्थित भक्तगण जय कन्हैया लाल की के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।