पिपरा लालमन में श्रीमद भागवत कथा सुनाते आचार्य।संवाद
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सुकरौली। क्षेत्र के पिपरा लालमन गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास पूज्य अभियेंद्र गर्गाचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए गहन आध्यात्मिक शिक्षा हैं। माखन चोरी की लीला यह बताती है कि भगवान भक्तों के निर्मल और प्रेममय हृदय को स्वीकार करते हैं, जबकि पूतना, शकटासुर और तृणावर्त वध अहंकार, छल, जड़ता और बुराइयों के अंत का प्रतीक हैं। दामोदर लीला का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान किसी बल से नहीं, बल्कि भक्त के निष्कपट प्रेम और भक्ति से बंधते हैं।
गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि जब ब्रजवासियों ने भगवान की शरण ली, तब श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत धारण कर उनकी रक्षा की। यह प्रसंग सिखाता है कि संकट की घड़ी में सच्चा सहारा केवल भगवान हैं। उन्होंने प्रकृति संरक्षण, गौ सेवा, विनम्रता और सामूहिक एकता को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि अहंकार का अंत और भक्ति की विजय ही सनातन धर्म का मूल संदेश है।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष के साथ आरती में भाग लिया और धर्ममय जीवन अपनाने का संकल्प लिया।