पडरौना। कड़ाके की ठंड से मेडिकल कॉलेज की ओपीडी के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में पेट संबंधी विकारों से पीड़ित मरीजों की तादाद बढ़ गई है।
इसमें ज्यादातर मरीज गैस्ट्रोपेरेसिस, कब्ज, अपच, गैस, पेट में ऐंठन, दस्त आदि की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टर भोज्य पदार्थ सही से नहीं पचने से इस तरह की परेशानी बता रहे हैं। मरीजों को दवा के साथ खाने-पीने में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण राव ने बताया कि ज्यादातर मरीज पेट संबंधी समस्या से पीड़ित ही इस समय आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सर्दियों में जैसे-जैसे पारा गिरता है, वैसे-वैसे रक्त वाहिकाओं में संकुचन और पाचन तंत्र के भीतर आंतरिक दबाव बढ़ने लगता है। यह बढ़ा हुआ दबाव पेट में ऐंठन, दर्द, अपच, दस्त, गैस आदि की वजह बनता है। अव्यवस्थित खानपान की वजह से भी दिक्कत होती है।
सर्दियों में शारीरिक गतिविधि भी सामान्य दिनों के सापेक्ष काफी कम हो जाती हैं। एक ही जगह लंबे समय तक बैठे रहने से गैस्ट्रोपेरेसिस का खतरा बढ़ जाता है। इसके चलते पेट में कसाव, पेट फूलने, मतली आदि की परेशानी होती है। बचाव के लिए व्यायाम जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस तरह के मरीजों की संख्या हर दिन 100 से अधिक पहुंच रही है। उन्हें दवा के साथ ठंड से बचाव करते हुए मसालेदार खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करने की सलाह दी जा रही है।