महदेवा गांव के पास कटान करती गंडक नदी।
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कुशीनगर जिले के खड्डा क्षेत्र के महदेवा गांव में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान में महदेवा गांव से मात्र कुछ ही दूर पर नदी बह रही है। वहां बाढ़ खंड की तरफ से किए जा रहे बचाव कार्य कारगर नहीं हो रहे हैं।
खड्डा विकास खंड के महदेवा गांव पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। चार साल पहले नदी, गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर दक्षिण में बह रही थी।
गांव व नदी के बीच उपजाऊ भूमि पर लोग खेती करते थे। अचानक नदी की धारा गांव की ओर बढ़ने लगी। पिछले वर्ष नदी व गांव के बीच लगभग दो सौ मीटर फासला रह गया था। वह भी कई प्रयास के बाद। ग्रामीणों की मांग थी कि छितौनी-बगहां रेल सह सड़क पुल की सुरक्षा के लिए बने ठोकर को लगभग 1,500 मीटर बढ़ा दिया जाए तो गांव सुरक्षित हो जाएगा। खेती तो कट गई, लेकिन घर बच जाता तो जीवन आसान हो जाता।
बाढ़ विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय कमेटी ने बांध बनाने की मांग को खारिज कर परक्युपाइन लगाने की सिफारिश कर दी। लगभग दो करोड़ रुपये से ज्यादा धन खर्च कर महदेवा गांव को बचाने के लिए परक्युपाइन लगाया गया। नदी में इस वर्ष बाढ़ कम आने के चलते कटान रुकी रही तो लोगों ने समझा कि यह विधि काम कर जाएगी।
अचानक एक सप्ताह से नदी ने कटान शुरू कर दी है। दो करोड़ रुपये का परक्युपाइन नदी के वेग को रोक नहीं पा रहा है। रविवार को नदी गांव से मात्र कुछ मीटर दूर रही और कटान जारी थी। बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने के प्रयास कारगर होते नहीं दिख रहे। ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि नथुनी कुशवाहा सहित ग्रामीणों ने गांव को बचाने की गुहार लगाई है।
इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ मनोरंजन कुमार का कहना है कि बचाव कार्य चल रहा है। एचएलसी को बांध बनाने के लिए प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर परक्युपाइन लगाने पर सहमति दी थी। परक्युपाइन लगा दिया गया है।