तमकुहीरोड। गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से नरवाजोत और विरवट कोन्हवलिया समेत अहिरौलीदान तक एपी तटबंध पर कटान का खतरा बरकरार है। सभी ठोकरों व संवेदनशील बिंदुओं पर नदी टकराकर बह रही है। कट एंड वन से कट एंड टू के बीच भी नदी बांध से टकरा रही है। इससे खतरे की आशंका बनी हुई है।
वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर सोमवार को नदी का डिस्चार्ज 1.19 लाख क्यूसेक पर रहा। इससे नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। इससे नदी के बैक रोलिंग की संभावना भी बढ़ गई है, जो बांध की सुरक्षा के लिए कभी भी खतरनाक साबित हो सकती है। यही कारण है कि बांध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपराघाट, जवही दयाल, मुसहर टोला, विरवट कोन्हवलिया, बांकखास, नोनियापट्टी, बाघाचौर, कचहरी टोला व अहिरौलीदान आदि गांवों के लोग तटबंधों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अभी भी गंडक नदी इन ठोकरों व तटबंधों से टकराती हुई बह रही है और कभी भी कटान की वजह बन सकती है। यही हाल कट एंड वन से कट एंड टू बांध के साथ अन्य संवेदनशील स्थानों पर है। इसके कई छोटे-छोटे ठोकर अभी भी कटान की जद में हैं। गांववालों का कहना है कि तटबंध के कुछ जगहों पर ही इस साल बचाव कार्य कराए गए हैं, लेकिन अधिकांश हिस्सों में कोई कार्य नहीं कराया गया है। नतीजा यह है कि कई जगहों पर आज भी कटान का खतरा बना हुआ है। गांव वालों के अनुसार जब तक सभी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक इस समस्या से निजात मिलना मुश्किल है। वहीं, कटान के संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड के एसडीओ रमेश यादव, जेई चंद्रप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील यादव, जेई विनोद शर्मा, जेई रामचंद्र प्रसाद आदि लगातार तटबंधों की निगरानी कर रहे हैं। इस संबंध में बाढ़ खंड एसडीओ रमेश यादव ने बताया कि बांध पूरी तरह सुरक्षित है और लगातार निगरानी की जा रही है।