फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांधी दर्शन अब भी प्रासंगिक : प्रो. मणि भूषण

Fri, 26 Feb 2016 11:41 PM IST
kushinagar beauro
विज्ञापन
विज्ञापन
हाटा। महात्मा गांधी के दर्शन को समझने के लिए आलोचक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा तो उसे उसके प्रश्नों का उत्तर उसी दर्शन से प्राप्त हो जाएगा। गांधी का दर्शन सामाजिक एकता, जाति प्रथा, धार्मिक उन्माद सहित सभी बुराइयों को समाप्त कर वसुंधैव कुुटुंबकम का संदेश देता है। ऐसे में इसकी प्रासंगिकता आलोचनाओं से परे है।
विज्ञापन



यह बातें कस्बे के श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय सभागार में महात्मा गांधी अध्ययन केंद्र की ओर से गांधी दर्शन पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान माला के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मणि भूषण ने कही।

उन्होंने कहा कि गांधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम में आंदोलन छेड़ने के बाद जब उसे बीच में रोका तो उसका भी कारण अहम था। गांधी ने हिंसा को कभी बढ़ावा नहीं दिया। उनका मुख्य अस्त्र अहिंसा ही था। दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने इसी अस्त्र के सहारे सफलता भी प्राप्त की।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि गांधी दर्शन को यदि अपना लिया जाए तो वर्तमान भारत की समस्याएं काफी हद तक हल हो सकती हैं। सम्पूर्णनंद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि गांधी का दर्शन भारतीय सनातन परंपरा पर आधारित है। गांधी जी जब समस्या से घिरते थे तो भगवद् गीता की शरण लेते थे। वे सर्व धर्म समभाव को ऊपर रख ही चले थे। उनका दर्शन मानवीय गरिमा को बल   देता है।


गांधी दर्शन यह कहता है कि साध्य की प्राप्ति तभी संभव है जब साधन शुचिता से परिपूर्ण होगा। अहिंसा के इस पुजारी ने सत्य को अपना अस्त्र बनाया तथा समाज को एक सूत्र में पिरोने और छुआछूत को समाप्त करन के लिए सहभोज कार्यक्रम भी चलाया। गोष्ठी में डॉ. विनीता भाटिया ने गांधी जी के नारी सशक्तिकरण पर बोलते हुए कहा कि नारी अहिंसा की प्रतिमूर्ति है। यह पुरुष की गुलाम कत्तई नहीं है।

जिसे अबला समझा जाता है यह इतनी सबल है कि किसी भी समस्या का अंत करने में कभी पीछे नहीं हटती है। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता कर रहे बुद्ध पीजी कॉलेज के बीएड विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोद कुमार पांडेय ने कहा कि अहिंसा ही गांधी का ब्रह्मास्त्र था। उनका कहना था कि हम मारेंगे नहीं लेकिन पीछे भी नहीं हटेंगेे।

व्याख्यानमाला में आए आगंतुकों के प्रति महाविद्यालय प्रबंध समिति के प्रबंधक अग्निवेश मणि ने आभार जताया।स्वागत प्रबन्ध समिति के मंत्री गंगेश्वर पांडेय, प्राचार्य डा.रामसुभाष पांडेय ने संयुक्त रूप से किया। संचालन महाविद्यालय के शिक्षकएवं गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक मोहन पांडेय ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें