पिपराघाट के कई पुरवों में घुसा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड/खड्डा। गंडक नदी का पानी रविवार को तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के पिपराघाट गांव के कई पुरवों में घुस गया है। आलम यह है कि सड़कों और विद्यालयों तक पानी आ गया है। नदी के जलस्तर में चढ़ाव-उतार से नरवाजोत और एपी तटबंध पर भी दबाव बढ़ गया है।
सेवरही विकास खंड का पिपराघाट ग्राम सभा बांसी व गंडक नदी के दोआब में स्थित है। इसके अधिकांश टोले निचले हिस्से में बसे हैं और गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही इनमें भी पानी भर जाता है। शनिवार को वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में 2.93 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद पिपराघाट के मुसहरी टोला, शिव टोला, मोतीराय टोला, इमिलिया टोला, देवनारायन टोला, हनुमान टोला और उपाध्याय टोला के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
वहीं तवकल टोला व बुटन टोला के परिषदीय स्कूलों में भी पानी भर गया है। इन गांवों को जोड़ने वाली सड़कें भी जलमग्न हो गई हैं। इससे इन गांवों के लोगों की आवागमन के साथ अन्य कई तरह की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। जयपुर, रानीगंज, नरवा टोला, जोगनी, नरवाजोत सहित अन्य पुरवे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं और फसलें की डूब गई हैं।
शिव टोला निवासी शिवपूजन निषाद बताते हैं कि बरसात के चार महीने निचले हिस्से में बसे गांवों के लोगो के लिए सर्वाधिक मुश्किलों से भरे होते हैं। गंडक नदी का पानी इन पुरवों में फैल जाने के कारण लोगों का जीवन प्रभावित होता है। यह सिलसिला सितंबर तक जारी रहता है। मोतीराय टोला के विपिन यादव कहते हैं कि गांव में पानी भर जाने से कई लोगों को बांध पर प्लास्टिक तानकर अथवा फूस की झोपड़ी बनाकर रहना पड़ रहा। बाढ़ की चपेट में आ चुके अशोक मुखिया, राजकुमार, विक्रम, कुंदन, रघुनाथ, रामचंद्र, कैलाश, रामसूरत, लक्ष्मण आदि का कहना है कि उनके घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। उनके सामने रहने व खाने पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है। इन लोगों ने तहसील प्रशासन से प्रभावित लोगों की मदद कराए जाने की मांग की है। तहसीलदार रामप्यारे का कहना है कि प्रभावित गांवों में राजस्वकर्मी हर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बाढ़ खंड ने बांध की निगरानी बढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी में शनिवार को 2 लाख 93 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद सेवरही क्षेत्र में गंडक नदी रविवार से एक बार फिर उफान पर आ गई है। नरवाजोत बांध से एपी बांध के अहिरौलीदान तक तटबंध के सभी संवेदनशील जगहों पर पानी का दबाव बढ़ने से कटान का खतरा बढ़ गया है। खतरे को भांपते हुए बाढ़ खंड विभाग भी अलर्ट हो गया है और बांध की निगरानी बढ़ा दी गई है।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत बांध, पिपराघाट से एपी बांध, अहिरौलीदान तक लगभग बीस किलोमीटर में गंडक नदी बहती है। वाल्मीकि बैराज से 2.93 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी पिपराघाट में लगभग दो किलोमीटर दूरी तक बांध से सटकर बहने लगी। इसी तरह बिनटोली गांव के सामने 1.480 पर बने ठोकर और नोनियापट्टी में किलोमीटर 12.860 पर बने ठोकर के साथ अन्य कई ठोकरों पर नदी का दबाव तेज हो गया। इसी तरह चैनपट्टी गांव के सामने किलोमीटर 2.400 से किलोमीटर 2.500 के बीच बैकरोलिंग बांध के लिए खतरा बन गई है। यही स्थिति घघवा जगदीश, जवही दयाल, विरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर में भी बनी हुई है। वहां कई संवेदनशील जगहों पर नदी बांध से सटकर बह रही है। हालांकि बाढ़ खंड के अभियंताओं ने पूरे बांध की निगरानी बढ़ा दी है। इसके बावजूद क्षेत्र के दीनानाथ सिंह, पप्पू यादव, बृजकिशोर साहनी, पुजारी सिंह, ध्रुव निषाद, संजय सिंह, प्रभुनाथ यादव, गौतम सिंह, जेपी निषाद आदि ने नदी के रुख पर चिंता जताई है और इन्हें आशंका है कि नदी का जलस्तर घटने पर सभी संवेदनशील स्थानों पर कटान का खतरा बढ़ सकता है और बांध के साथ गांवों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ा है, जिसे लेकर सभी संवेदनशील जगहों की निगरानी बढ़ा दी गई है।