जवही दयाल में एपी बांध के किनारे लगाए गए पत्थर। संवाद
तमकुहीरोड। बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। वाल्मीकिनगर बैराज से सोमवार शाम को डिस्चार्ज 1.17 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। इसका असर यह हुआ कि मंगलवार को सेवरही क्षेत्र में कई स्थानों पर एक बार फिर पानी का दबाव बनना शुरू हो गया। लोगों का कहना है कि यह डिस्चार्ज सितंबर तक चलेगा। ऐसे में डिस्चार्ज बढ़ने का सिलसिला जारी रहा तो तटबंधों पर खतरा कभी भी बढ़ सकता है, हालाकि डिस्चार्ज में हो रहे उतार चढ़ाव को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने तटबंधों पर अपनी चौकसी तेज कर दी है।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक लगभग साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। यह एपी बांध के किनारे आबादी वाले गांवों से गुजरती है। पिछले कई सालों से नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़े के कारण नदी के तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए थे। यही कारण है कि जब भी नदी का डिस्चार्ज बढ़ता है तो तटबंधों पर दबाव बढ़ जाता है। इस समय बाढ़ खंड सेवरही की ओर से नरवाजोत, जवही दयाल, मुसहर बस्ती, ठोकर नवंबर चार और विरवट कोन्हवलिया में परियोजना कार्य जोर शोर से पूरा कराया जा रहा है। इसका लगभग तीन चौथाई कार्य पूरा कराया जा चुका है और शेष कार्य जारी है, लेकिन कई दिन तक शांत रहने के बाद अचानक सोमवार की शाम नदी का डिस्चार्ज 1.17 लाख क्यूसेक पहुंच गया।
मंगलवार को डिस्चार्ज घट कर 80 हजार क्यूसेक के आस पास पहुंच गया है। कई जगहों पर एक बार फिर पानी का दबाव बनना शुरू हो गया है। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, प्रदीप सिंह, मनोज गुप्ता, बृजकिशोर साहनी, ओमप्रकाश निषाद, दीनानाथ सिंह आदि बताते हैं कि तटबंधों पर डिस्चार्ज का खेल सितंबर तक बना रहता है।