तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज दो-तीन दिन से डेढ़ लाख क्यूसेक पर स्थिर है, लेकिन नदी चेतावनी बिंदु से 60 सेमी ऊपर बह रही है। वहीं नरवाजोत व पिपराघाट बांध के अधिकतर हिस्सों में पानी का दबाव बना है। पिछले साल यहां नदी काफी तबाही मचाई थी। अभी तक यहां प्रस्तावित परियोजना का कार्य अधूरा है। इसलिए लोगों को आशंका है कि यदि गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया तो पिछले साल की तरह फिर पुनरावृत्ति हो जाएगी। इसको लेकर तटवर्ती गांव के लोगों को बाढ़ की चिंता सता रही है।
वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में छोड़ा जाने वाला पानी का डिस्चार्ज तीन दिन से डेढ़ लाख क्यूसेक पर रूका है। बुधवार को सुबह नदी का डिस्चार्ज 1.31 लाख क्यूसेक था तो दोपहर में 1.44 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया, जिसके चलते नरवाजोत व पिपराघाट बांध के अधिकांश हिस्सों में पानी का दबाव बना हुआ है। यह वही क्षेत्र है जो विगत कई साल से लगातार बाढ़ की विभिषिका की चपेट में रहा है।
पिछले साल मानसून सत्र के शुरू में ही वाल्मीकिनगर बैराज से साढ़े पांच लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ दिया गया था। इससे नदी उफान पर आ गई। नरवाजोत के किमी 1.700 पर बने ठोकर पर कटान का खतरा बढ़ गया था और ठोकर के साथ उसके अप एंड डाउन स्ट्रिम में किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ी थी7 ठोकर की खराब स्थिति को देखते हुए इस साल यहां शासन ने 9.73 करोड़ की लागत से बंधे व ठोकर पर रिवेटमेंट कार्य के साथ उसके अप एंड डाउन स्ट्रिम में परक्यूपाइन निर्माण आदि की मंजूरी दी है।
जिसके सापेक्ष लगभग तीन माह से बचाव कार्य जारी भी है, बावजूद इसके कार्य अभी तक पूरा नहीं होने से यहां खतरा बना हुआ है और ठोकर के नोज के साथ नदी भंगी टोला, दहारी टोला और तवकल टोला में कई स्थानों पर बांध से सटकर बढ़ रही है। इसी तरह एपी बांध के जवही दयाल, मुसहर बस्ती, विरवट कोन्हवलिया, नोनिया पट्टी, कचहरी टोला में भी नदी ठोकरों से सट कर बह रही है।
क्षेत्र के पुजारी सिंह, प्रभुनाथ यादव, अशोक कुशवाहा, लखीचंद गुप्ता, केदार सिंह, राजू चौहान आदि का कहना है कि फिलहाल बांध को कोई खतरा नहीं है, लेकिन आशंका है कि यदि गंडक नदी में कही भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है तो एक बार फिर पिछले साल की स्थिति की पुनरावृत्ति हो सकती है। इस संबंध में बाढ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि पूरे तटबंध की स्थिति सामान्य है और कही कोई खतरा नहीं है, सभी संवेदनशील जगहों पर नजर रखी जा रही है।