फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लॉकडाउन: शहर की सड़कों पर छाया सन्नाटा, गलियां भी उदास

विज्ञापन
वीरान पड़ा कसया नगर से होकर देवरिया जाने वाला स्टेट हाइवे-76। - फोटो : KUSHINAGAR
विज्ञापन
लॉकडाउन: शहर की सड़कों पर छाया सन्नाटा, गलियां भी उदास
विज्ञापन

पडरौना। करीब दो सौ बरस पुराने पडरौना शहर ने यूं तो कई बार कर्फ्यू का दंश झेला है लेकिन जो भय इस वक्त है, वैसा कभी नहीं दिखा। आम दिनों में संकरी दिखने वाली शहर की मुख्य सड़कों ही नहीं गलियों में भी आम आदमी नहीं दिख रहा। यह सन्नाटा बीच बीच में केवल कुछ गाड़ियों की आवाजाही से ही टूट रहा है। सभी प्रमुख चौराहों पर खाकी का पहरा है। परदेश से पैदल या बसों से लौटे राहगीर भी जल्दी-जल्दी घर भाग रहे हैं। रविवार को सुबह नौ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक अमर उजाला टीम ने इस शहर की पड़ताल की।
सुबह नौ बजे: सोनारी गली
पडरौना शहर के सबसे पहले आबाद हुए मुहल्लों में शुमार सोनारी गली में लोग अपने घरों में थे। भाजपा नेता व पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रितिक सिंह गौतम अपने कुछ सहयोगियों के साथ पहुंचे थे। वे घर-घर जाकर लोगों को जरूरत के सामान के बारे में पूछ रहे थे। कुछ लोगों को अपने पास से नि:शुल्क सामान भी दिया।
विज्ञापन

सुबह साढ़े नौ बजे: सुभाष चौक
कसया की तरफ से 20-25 पैदल राहगीर आते दिखे। पुलिस कर्मियों ने रोककर पूछताछ की। सभी को बिहार के बगहा जाना था। पैदल ही गोरखपुर से आ रहे थे। पुलिस कर्मियों व सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने सभी को हाथ धुलवाकर सेनेटाइजर लगाया। इसके बाद लंच पैकेट व पानी की बोतल दी। पुलिस कर्मियों ने गन्ना गिराकर खाली लौट रही ट्रैक्टर-ट्राली को रोककर बांसी तक भेजा। नगर पालिका के ईओ एएन सिंह भी एक गाड़ी में लंच पैकेट लेकर पहुंचे और आ रहे राहगीरों को पैकेट दिया।
सुबह साढ़े दस बजे: बस स्टेशन
पडरौना बस स्टेशन पर गोरखपुर व लखनऊ की दो बसें पहुंची। एक साथ बड़ी संख्या में यात्री उतरकर अपने घर की तरफ निकले। बस स्टेशन गेट पर खड़े टीएसआई परमहंश ने यात्रियों से जानकारी ली। यात्रियों ने बताया कि वे लोग लखनऊ व गोरखपुर से यहां तक पहुंचे हैं। इन यात्रियों को भी लंच पैकेट देने के बाद ट्रैक्टर-ट्राली से भेजवाया गया।
सुबह 11 बजे: बावली चौक
शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित बावली चौक पर रामकोला व खड्डा से आने वाली सड़कें मिलती हैं। आम दिनों में यहां हर दिन भीड़ रहती हैं लेकिन लॉक डाउन के बाद से यह चौराहा शांत है। सुबह 11 बजे यहां कुछ पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे। उधर आने का कारण पूछा और परिचय जानने के बाद वे पुन: ड्यूटी में लग गए। यहां दूर-दूर तक पुलिसकर्मियों के अलावा कोई दूसरा नहीं दिख रहा था। बेचारे पुलिसकर्मी भी बिना कुछ खाए-पीए ड्यूटी निभा रहे थे।
दोपहर 12 बजे: रेलवे स्टेशन का मॉल गोदाम
पडरौना रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी पहुंची। इस पर एफसीआई के लिए चावल व गेहूं लदा था। मजदूर भोला, श्रीकांत, रामनिवास आदि अपने काम में जुटे हुए थे। मालगाड़ी के डिब्बे से अनाज की बोरियों को उतारकर ट्रकों पर रख रहे थे। ट्रक चालक बृजेंद्र का कहना था कि ऐसा मंजर पहले कभी नहीं दिखा। चाय-पानी तक नहीं मिल रहा है, लेकिन गोदाम तक अनाज पहुंचाना भी जरूरी है।
दोपहर साढ़े बारह बजे: जटहां रोड
पडरौना शहर के इस उत्तरी हिस्से में मंसाछापर, खिरकिया व जटहां बाजार के लिए सवारी वाहन मिलते हैं। कई डॉक्टरों का क्लीनिक भी इसी रोड पर है लेकिन हर जगह सन्नाटा था। मेन रोड से अंदर की गलियों में इक्का-दुक्का लोग नजर आ रहे थे। लक्ष्मीबाई स्कूल के पास कुछ महिलाएं साइकिल पर मिट्टी का बर्तन लेकर पहुंचे कुम्हार से बर्तन खरीद रही थीं। महिलाओं का कहना था कि अष्टमी पूजन के लिए यह बर्तन जरूरी है। मुहल्ले में मिला तो जल्दी से खरीद लिया।
दोपहर एक बजे: कठकुइयां मोड़
कसया और तमकुही व दुदही की तरफ से आने वाली गाड़ियां इसी चौराहे पर रुकती हैं। शहर के सबसे व्यस्त रहने वाले चौराहों में से एक इस चौराहे पर भी सन्नाटा था। गांधी प्रतिमा के पास पुलिसकर्मी बैरिकेडिंग लगाकर खड़े थे। यहां पहुंचे सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रबंधक डॉ. अरुण श्रीवास्तव पुलिस कर्मियों के लिए चाय-नाश्ता लेकर पहुंचे थे। पुलिस कर्मियों का हाथ धुलवाकर सेनेटाइजर लगाया। इसके बाद उन्हें चाय, बिस्कुट आदि खाने को दिया।
विज्ञापन

दोपहर डेढ़ बजे: मेन बाजार
पडरौना शहर के हृदय स्थल मेन बाजार में आम दिनों में भीड़ के चलते बाइक से निकलने में भी दिक्कत होती है। लेकिन लॉकडाउन के बाद से ही सन्नाटा है। सड़क इतनी चौड़ी दिख रही है कि चार पहिया वाहन भी आराम से निकल जाए। तिलक चौक पर कुछ पुलिसकर्मी मौजूद थे लेकिन मेन बाजार की सभी दुकानें बंद थीं और लोग अपने घरों में ही बंद थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें