पडरौना। पेट्रोल पंपों पर ईंधन की किल्लत कम नहीं हुई है। इसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले मालवाहकों के पहिए की रफ्तार घंटों तक थम जा रही हैं। ऐसे में मालवाहकों से निर्धारित स्थान पर पहुंचने वाला सामान देर से पहुंचेगा। इसकी वजह पंप ड्राई होने के बाद तेल आपूर्ति व लगने वाला 48 घंटे का समय बना हुआ है। आपूर्ति को लेकर मौजूदा व्यवस्था के सामने पंप संचालक भी मजबूर दिखाई दे रहे हैं। संचालकों का कहना है कि तेल कंपनियां जैसे उन्हें आपूर्ति दे रही हैं। वैसे ही ग्राहकों को ईंधन की आपूर्ति कर दी जा रही है। अब हालात यह है कि सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद जब बीच में मालवाहकों में ईंधन खत्म हो जा रहा है तो चालकों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में उन पर लदे माल देरी से पहुंचने की बात चालक मान रहे हैं। शुक्रवार को दोपहर बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-28 के किनारे संचालित पेट्रोल पंपों पर कहीं पेट्रोल की उपलब्धता रही तो कहीं डीजल की। ऐसे में पेट्रोल से चलने वाले छोटे वाहनों का आवागमन होता दिखाई दिया लेकिन राजमार्ग पर अन्य दिनों की अपेक्षा बड़े व मालवाहक वाहनों का आवागमन कुछ कम दिखाई दिया।
ईंधन की किल्लत के चलते पिपरही भड़कुलवा के पास संचालित एक पेट्रोल पंप पर मालवाहकों का जमावड़ा लगा हुआ था। पड़ताल करने पर बृहस्पतिवार दोपहर बाद से ही डीजल नहीं होने की बात सामने आई। यहां पर करीब 50 से अधिक मालवाहकों के पहिए डीजल के अभाव में बृहस्पतिवार रात करीब 8:0 बजे से थम गए थे। चालक डीजल की आपूर्ति को लेकर इंतजार कर रहे थे। इस किल्लत को लेकर मालवाहकों की कुछ इस तरह ही प्रतिक्रिया।
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मैं पिछले 12 घंटों से इस पेट्रोल पंप के सामने लाइन में खड़ा हूं। टंकी लगभग खाली है आगे का सफर करीब 400 किलोमीटर बिहार के खगड़िया तक का है। ट्रेलर पर माल लोड होने के बाद तेल भरवाए थे,लेकिन कुशीनगर पहुंचते टैंक में आगे की दूरी तय करने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन नहीं होने के चले आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे सोन व खाने में परेशानी के साथ लदा सूखा माल समय पर नहीं पहुंचने पर डांट भी सुननी पड़ेगी। अभी कब आपूर्ति होगी,पंप संचालक कुछ नहीं बता पा रहे है। वे सिर्फ यह कह रहे हैं कि टैंक आने के आधे घंटे बाद तेल दे दिया जाएगा। -रामू, औरैया, ट्रेलर चालक
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बृहस्पतिवार की रात करीब 11:0 बजे से पेपर रोल लेकर डीजल के अभाव में खड़ा हूं। करीब 12 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन टैंकर आने का कोई अता पता नहीं है। असम के गुवाहाटी तक जाना है। करीब 1300 किलोमीटर के लिए, टैंक फुल कराया था, लेकिन 1500 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां पहुंचने के बाद टैंक में आगे के लिए मामूली तेल है। ऐसे में 300 लीटर डीजल की जरूरत है। इस देरी से खर्च बढ़ रहा है और समय से माल नहीं पहुंचने पर कारोबारी का भी डांट सुनना पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन को मालवाहकों के लिए बेहतर प्रबंध किया जाना चाहिए,ताकि उनके पहिए थम नहीं चलते रहें। -मुख्तार सिंह, अमृतसर, ट्रेलर चालक
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तेल किल्लत व कमी से कम हुआ वाहनों का आवागमन
जब से ईंधन की किल्लत शुरू हुई है, तब से हाईवे से गुजरने वाले वाहनों की संख्या में भी कमी आई है। इससे बड़े व छोटे दोनों वाहन शामिल हैं। नाम न छापने की शर्त पर हेतिमपुर टोल टैक्स के प्रबंधक ने बताया कि डीजल की कमी से बड़े वाहनों के आवागमन में कमी आई है, इसके अलावा छोटे वाहन भी कम हुए हैं। जिसके चलते पहले से टैक्स में लाखों रुपये की प्रतिदिन कमी आई है।
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पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति को लेकर तेल कंपनियों के अधिकारियों से बातचीत कर बेहतर बनाए जाने का प्रयास जारी है। जिला प्रशासन की तरफ से मिले निर्देशों का अनुपालन कराया जा रहा है। कहीं पर कोई दिक्कत सामने आ रही है तो उसे दूर कराया जा रहा है। -कृष्ण गोपाल पांडेय, जिला पूर्ति अधिकारी।
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डीजल के इंतजार में पेट्रोल पंप पर खड़ा ट्रैक्टर।संवाद- फोटो : Samvad