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Kushinagar News: सर्वर डाउन तो कहीं वरासत का पेंच, फार्मर रजिस्ट्री के लिए भटक रहे किसान

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- जिले में 6.47 लाख किसानों में से 4.88 लाख की ही बन सकी रजिस्ट्री
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- धान खरीद के दौरान पंजीकरण और सत्यापन में आ सकती है अड़चन
- लक्ष्य पूरा करने के लिए कृषि और खाद्य विभाग के सामने चुनौती
- पिछले वर्ष 11 लाख क्विंटल धान की खरीद, इस वर्ष अभी नहीं मिला है लक्ष्य

पडरौना। जिले में 1.59 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी नहीं होने से धान खरीद में इनकी मुश्किलें बढ़नी की आशंका है। नए नियमों के तहत फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज कृषि क्षेत्र के अनुसार ही किसान क्रय केंद्रों को धान बेच सकते हैं। जिले में 6.47 लाख किसानों के सापेक्ष 4.88 लाख की ही फार्मर रजिस्ट्री हो सकी है। सर्वर डाउन रहने, दस्तावेजों के नाम में अंतर व अन्य कारणों से शेष किसानों किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकी है।
सरकार की ओर से किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराई जा रही है। इसके तहत किसानों का विवरण दर्ज किया जाता है, जिससे उनकी पहचान और कृषि संबंधी जानकारियों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा सके। फार्मर रजिस्ट्री के तहत दर्ज आंकड़ों के अनुसार ही किसानों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके बावजूद जिले में अब तक करीब 75 प्रतिशत किसानों की रजिस्ट्री पूरी हुई है।
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इन किसानों की रजिस्ट्री समय से पूरी नहीं हुई, तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और कृषि संबंधी प्रक्रियाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। धान खरीद का समय नजदीक आने के साथ ही फार्मर रजिस्ट्री का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। किसानों को अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें पंजीकरण और सत्यापन की भूमिका भी अहम है।
तकनीकी कारणों से अटकी फार्मर रजिस्ट्री

फार्मर रजिस्ट्री बनवाने में सबसे बड़ी समस्या आधार में नाम कुछ और खतौनी में दर्ज नाम में अंतर है। पोर्टल पर नेम मैच स्कोर कम हो जाता है और रजिस्ट्री अटक जाती है। इसके लिए पहले लेखपाल से खतौनी दुरुस्त करानी पड़ रही है। कई किसानों की जमीन के विरासत का बंटवारा नहीं हुआ, खसरा नंबर, सर्वे नंबर पोर्टल पर नहीं दिखता। बटाईदार/किराए पर खेती करने वालों की तो जमीन ही उनके नाम नहीं है इसलिए उनकी रजिस्ट्री ‘कल्टिवेटर/टेनेंट मॉड्यूल’ से करनी पड़ रही है, यह जानकारी गांव में कम लोगों को है। ओटीपी आधार से जुड़े मोबाइल पर आता है। बहुत से किसानों का नंबर बदल गया है या आधार से लिंक ही नहीं है। चूंकि बिना ओटीपी के रजिस्ट्रेशन आगे नहीं बढ़ता, इसलिए प्रक्रिया रुक जाती है। वेबसाइट का सर्वर डाउन रहने से भी परेशानी होती है। सीएससी संचालक बताते हैं कि रात में ही साइट चलती है। किसान दिन में 4-5 बार सीएससी के चक्कर काटते हैं, फिर भी काम नहीं होता। इसके अलावा बहुत से किसानों को अभी भी पता ही नहीं है कि फार्मर आईडी क्यों जरूरी है। उन्हें लग रहा है कि ये सिर्फ पीएम किसान की किस्त के लिए है। जबकि अब धान की एमएसपी खरीद, बीज-खाद अनुदान, फसल बीमा सब इसी आईडी से मिलेगा।
फार्मर रजिस्ट्री के लिए यह बरतें सावधानी
सीएससी जाने से पहले आधार कार्ड, खतौनी की नकल, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर साथ रखें। नाम में गलती हो तो पहले लेखपाल/तहसील में ठीक कराएं, सीधे पोर्टल पर बार-बार ट्राई न करें। यदि ऑनलाइन नहीं हो रहा तो गांव के कैंप, पंचायत सहायक, कृषि सखी / बीसी सखी से संपर्क करें। रजिस्ट्रेशन के बाद upfr.agristack.gov.in पर स्टेटस जरूर चेक करें।
आंकड़ों में फार्मर रजिस्ट्री
जिले में कुल किसान: 6.47 लाख
फार्मर रजिस्ट्री पूरी: 4.88 लाख
रजिस्ट्री से वंचित किसान: 1.59 लाख
रजिस्ट्री पूरी होने का प्रतिशत: करीब 75.4
रजिस्ट्री अधूरी होने का प्रतिशत: करीब 24.6
स्पीकअप
फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए बीते चार माह से ब्लॉक से लेकर तहसील का चक्कर लगा रहा हूं। कार्यालय पहुंचने पर कभी सर्वर डाउन रहता है, तो कभी ओटीपी आने में समस्या रहती है। इन दिनों में 20 से अधिक बार दौड़ चुका हूं। सुनने में आ रहा है कि अब फार्मर रजिस्ट्री के अभाव में धान खरीद नहीं होगी। इसको लेकर चिंता बढ़ गई है।
-मुनीब अंसारी, निवासी, मंझरिया।
करीब एक वर्ष पहले पिता का निधन हुआ था। वरासत भी हो गया है। खतौनी में सभी भाइयों का नाम तो चढ़ गया है लेकिन अभी तक अंश निर्धारण नहीं हुआ है। इसके चलते फार्मर रजिस्ट्री बनवाने में दिक्कत हो रही है। अंश निर्धारण के लिए कई बार तहसील का चक्कर लगा चुका हूं लेकिन कभी कुछ कमी तो कभी कुछ कमी बताकर वापस कर दिया जाता है।
-व्यास गुप्ता, निवासी, बतरौली धुरखड़वा।
फार्मर रजिस्ट्री के बिना उर्वरक लेने में होगी दिक्कत
किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए अपनी फार्मर रजिस्ट्री का विवरण प्रस्तुत करना होगा। यानी बिना फार्मर रजिस्ट्री के लिए किसानों को उर्वरक नहीं मिलेगा। हालांकि चकबंदी वाले गांवों के किसानों को इस नियम में छूट दी गई है। ऐसे किसानों को खाद लेने के लिए खसरा, आधार कार्ड आदि अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। यूरिया समेत अन्य उर्वरक लेने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री दिखानी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक किसानों तक खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है। जिन किसानों के पास फार्मर रजिस्ट्री नहीं है उन्हें आगामी फसल सीजन में खाद लेने में दिक्कत हो सकता है।
- नीरज गोंड, सहायक आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता, कुशीनगर।
जिले में कुल 6.47 लाख किसान हैं। इनमें से 4.88 लाख किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो गई है। अभी भी 1.59 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बाकी है। जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई उनकी फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए राजस्व समेत अन्य संबंधित विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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-अतींद्र सिंह, उप निदेशक कृषि, कुशीनगर।
वर्जन
जिनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं है ऐसे किसान धान विक्रय के लिए विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराएंगे। ऑनलाइन पंजीकरण और खतौनी में दर्ज नाम में यदि कोई अंतर नहीं है तो स्वयं ही ऑनलाइन मोड से सत्यापित हो जाएगा। इसके बाद वे धान विक्रय कर सकते हैं। यदि ऑनलाइन पंजीकरण और खतौनी में दर्ज नाम में यदि कोई अंतर है तो उन्हें एसडीएम से सत्यापित कराना पड़ेगा। इसके बाद भी उनकी धान खरीद की जाएगी।
-नरेंद्र कुमार तिवारी, उप संभागीय विपणन अधिकारी, कुशीनगर।
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