कसया। नगर पालिका परिषद के वार्ड नंबर 15 वीर सावरकर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक अनुराग कृष्ण शास्त्री ने कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। जिसे सुनकर श्रोता की आंखें नम हो गईं। कथा का रसपान कराते हुए कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता बचपन में एक साथ शिक्षा प्राप्त करने वाले ये दोनों मित्र बड़े होकर अलग-अलग रास्ते पर चले जाते हैं। सुदामा एक गरीब ब्राह्मण बनकर गरीबी से जूझने लगे जबकि कृष्ण द्वारिका के राजा हुए। सुदामा की पत्नी के आग्रह पर जब वह कृष्ण से मिलने द्वारिका गए तो कृष्ण ने बिना किसी भेदभाव के अत्यंत प्रेम के साथ उनका स्वागत किया और उनकी दरिद्रता को दूर किया। कहा कि आज के युग में कृष्ण और सुदामा के मित्रता मिलना असंभव है लेकिन मित्रता होनी चाहिए तो कृष्ण और सुदामा की तरह ही होनी चाहिए।