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15 August: स्वतंत्रता आंदोलन में रणबांकुरों के खून से लाल हो गई थी सेवरही की धरती, उनके स्मारक आज भी हैं गवाह

Fri, 11 Aug 2023 05:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।

सार

सेवरही का शहीद स्मारक 1946 से 1996 तक काफी उपेक्षित रहा। लेकिन वर्ष 1996 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने शहीद स्मारक के सुंदरीकरण के लिए 10 लाख रुपये का आवंटन किया था। इससे शहीद स्मारक का कायाकल्प किया गया और 2013 में डीएम के प्रयास से स्मारक परिसर का सुंदरीकरण कराया गया था।
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अगस्त क्रांति का गवाह सेवरही का शहीद स्मारक। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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स्वतंत्रता आंदोलन में सेवरही की धरती भी 11 रणबांकुरों के खून लाल हुई थी। सेवरही का शहीद स्मारक उनकी शहादत का गवाह है। उनके देशभक्ति के जज्बे को सलाम करने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी सेवरही आए थे। उन्होंने शहीद स्मारक की आधारशिला रख कर उनकी शहादत को श्रद्धापूर्वक नमन किया था।

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नौ अगस्त 1942 को जब महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद किया था। उस समय गोरखपुर जिले का हिस्सा रहा सेवरही भी उस आंदोलन की आंच से अछूता नहीं था। महात्मा गांधी के आह्वान पर अगस्त क्रांति की एक इबारत सेवरही में भी लिखी गई थी।

उधर, इन आंदोलन का शंखनाद होते ही अंग्रेजों ने महात्मा गांधी के साथ कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। आंदोलन की चिंगारी पूरे देश में भड़क गई। जगह-जगह सरकारी संपत्तियों में तोड़-फोड़ का सिलसिला शुरू हो गया। सेवरही क्षेत्र के आजादी के दीवानों ने इस आंदोलन का सक्रिय हिस्सा बन कर 12 व 13 अगस्त को रेल की पटरियों को उखाड़ना, पोस्ट आफिस, टेलीफोन और रेलवे स्टेशन को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया।
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इस आंदोलन का दमन करने के लिए अंग्रेजों ने कई गांवों में लोगों के घर फूंक दिए थे। इसके विरोध में 18 अगस्त 1942 को क्षेत्रीय लोगों ने कांग्रेस मंडल कार्यालय पर सभा आयोजित की। इसमें कई गांवों के लोग शामिल हुए थे। इसमें निर्णय किया गया कि अंग्रेजों की चीनी मिल, रेलवे स्टेशन और पोस्ट आफिस पर तिरंगा फहराएगा जाएगा।

इस संकल्प के साथ देशभक्तों की टोली ने तिरंगा फहराने के लिए कूच कर दिया। इसकी भनक अंग्रेज अफसरों को लग गई थी। उन्होंने मालगोदाम पर मोर्चा संभाल लिया था, लेकिन जब देशभक्तों का जत्था मालगोदाम की तरफ बढ़ने लगा तो हजारों की निहत्थे भीड़ पर अंग्रेजों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इससे सेवरही की धरती भी रणबांकुरों के खून से लाल हो गई थी।

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इस गोली कांड में क्षेत्र के जतन, जानकी चौबे, रघुवीर, धरीक्षन राय, मथुरा सिंह, रामानंद, लुटावन सिंह, भोला, फेकू भगत, भुइलोट और मंगल सहित 11 रणबांकुरे शहीद हो गए। 1946 में अंग्रेजों ने जब बड़े नेताओं को जेल से रिहा किया तो पंडित जवाहरलाल नेहरू फरवरी 1946 में गोरखपुर आए। वह सेवरही की घटना के बारे में सुनकर सेवरही आए और शहीदों के सम्मान में शहीद स्मारक की आधारशिला रख कर उनकी शहादत को सलाम किए थे। इसके बाद उन्होंने लोकमान्य इंटर काॅलेज के विजिटर बुक पर हस्ताक्षर किए थे।

सेवरही का शहीद स्मारक 1946 से 1996 तक काफी उपेक्षित रहा। लेकिन वर्ष 1996 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने शहीद स्मारक के सुंदरीकरण के लिए 10 लाख रुपये का आवंटन किया था। इससे शहीद स्मारक का कायाकल्प किया गया और 2013 में डीएम के प्रयास से स्मारक परिसर का सुंदरीकरण कराया गया था।
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