सीबीआई की वर्दी और लोगो दिखाकर डॉक्टर को जाल में फंसाया
रकम मिलने के बाद महिला अधिकारी की हत्या की गढ़ी कहानी
हाटा। सीबीआई अधिकारी की वर्दी और लोगो दिखाकर डॉक्टर से 35.75 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले जालसाजों ने रकम मेरठ और लखनऊ के बैंक खातों में मंगाई है। रकम मंगाने के बाद ठगों ने महिला अधिकारी की गोली मारकर हत्या होने की कहानी सुनाकर डॉक्टर को चुप रहने की हिदायत दी। पुलिस ठगी के रकम मंगाने वाले बैंक खातों को फ्रीज कराने में जुट गई है।
हाटा कोतवाली क्षेत्र के बतरौली गांव निवासी डॉ. शिवदत्त सिंह को साइबर ठगों ने पहले मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बनकर फोन किया। इसके बाद बताया कि पुलिस ने सदाकत खान नाम के व्यक्ति को पकड़ा है, जिसके पास से डॉक्टर के पहचान पत्र और दस्तावेज मिले हैं। आरोपियों ने डॉक्टर का नाम मानव और महिला तस्करी के मामले से जोड़ने की बात कहकर उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद नवजोत सिम्मी नाम बताने वाली महिला ने वीडियो कॉल कर खुद को सीबीआई की आईपीएस अधिकारी बताया।
महिला ने वर्दी और लोगो दिखाकर डॉक्टर को विश्वास में लिया और गिरफ्तारी से बचने के लिए सिक्योरिटी मनी जमा करने को कहा। ठगों के झांसे में आकर डॉक्टर ने 25 सितंबर को मेरठ के गंगानगर स्थित बैंक खाते में 25,75,215 और 30 सितंबर को लखनऊ के राजाजीपुरम स्थित बैंक खाते में 10 लाख रुपये जमा कर दिए। इस तरह कुल 35,75,215 रुपये की ठगी की गई।
रकम मिलते ही हत्या की कहानी सुनाई
डॉ. शिवदत्त सिंह से पूरी रकम मिलने के बाद ठगों ने कथित महिला अधिकारी नवजोत सिम्मी की बंगलूरू में गोली मारकर हत्या होने की कहानी गढ़ दी। डॉक्टर को मोबाइल से संदेश और दस्तावेज मिटाने के साथ ही किसी को कुछ नहीं बताने की धमकी दी गई। उन्हें हर तीन घंटे पर अपने सुरक्षित होने की सूचना भी देनी पड़ती थी। लगातार गिरफ्तारी का डर दिखाए जाने से डॉक्टर किसी से अपनी परेशानी साझा नहीं कर सके।
किसी को बताया होता तो शायद बच जाते
डॉ. शिवदत्त सिंह ने बताया कि वह और उनकी पत्नी घर पर अकेले रहते हैं। बच्चे दूसरे शहरों में रहते हैं। उनकी पत्नी कलावती देवी ने बताया कि वे सीधे-साधे लोग हैं और कभी पुलिस से कोई वास्ता नहीं पड़ा। वीडियो कॉल पर पुलिस और सीबीआई अधिकारी की वर्दी देखकर दोनों घबरा गए। डर के कारण कुछ सोचने-समझने की स्थिति नहीं रही। आसपास के लोगों को भी कुछ नहीं बता सके। अब उन्हें अफसोस है कि यदि समय रहते किसी को जानकारी दे दी होती तो शायद ठगी से बच जाते।
वर्जन
मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस पीड़ित से जानकारी लेकर उन बैंक खातों की जांच में जुटी है, जिनमें ठगी की रकम मंगवाई गई है। पुलिस की कोशिश है कि खातों में उपलब्ध रकम को फ्रीज कराया जा सके, जिससे पीड़ित के रुपये वापस मिलने की संभावना बन सके। पुलिस टीम काम कर रही है।
-सिद्धार्थ वर्मा, एएसपी कुशीनगर