तमकुहीरोड। बड़ी गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे नदी ने मंगलवार को विरवट कोन्हवलिया में कट एंड टू बांध के पास ठोकर को निशाने पर ले लिया है। ठोकर पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। यदि यह ठोकर कटान की भेंट चढ़ता है तो नदी सीधे बंधे से टकराने लगेगी। गांव के लोगों का कहना है कि ठोकर निगलने के बाद गंडक बांध से टकराते हुए तबाही मचा सकती है। वहीं, संभावित खतरे को भांपते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने बचाव कार्य को युद्ध स्तर पर कराना शुरू कर दिया है।
गंडक नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव बने रहने से नरवाजोत से लगायत अहिरौलीदान तक के अधिकांश ठोकरों व तटबंधों पर कटान का खतरा बना हुआ है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति विरवट कोन्हवलिया में ठोकर नंबर चार (कट एंड टू बांध) की बनी हुई है, जहां पिछले चार-पांच दिनों से नदी का भारी दबाव बना हुआ है। ठोकर को सुरक्षित बनाना बाढ़ खंड के अभियंताओं के लिए चुनौती बन गई है। हालांकि, विभाग ने यहां दिन-रात एक करके बोल्डर की डंपिंग करा कटान को रोकने की कोशिश की है।
बावजूद इसके ठोकर के अप व डाउन स्ट्रीम में नदी तबाही मचाने को आतुर दिख रही है। हमेशा धारा बदलने के लिए जानी जाने वाली गंडक नदी कब और किधर मुड़कर कटान शुरू कर देगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होता है। यही कारण है कि पहले जिस स्थान पर नदी कटान कर रही थी, अब उससे हटकर एक पुराने ठोकर को मंगलवार से निशाने पर ले लिया है। इससे अब उस ठोकर पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
गांव के लोगों का कहना है कि जिस हिसाब से ठोकर के पास नदी बैक रोलिंग कर रही है, वह ठोकर व बांध की सुरक्षा के लिए खतरनाक है। यदि समय रहते इस ठोकर को मजबूत नहीं किया गया तो कभी भी नदी कटान शुरू कर देगी। इससे बांध की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। बाढ़ खंड के एसडीओ रमेश यादव, जेई चंद्रप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील यादव, जेई विनोद शर्मा, जेई रामचंद्र प्रसाद आदि कटान रोकने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।