पडरौना। समय बीतने के बाद भी बाढ़ से बचाव का कार्य पूरा नहीं हो सका है। बृहस्पतिवार की रात हुई बारिश से एपी, नरवाजोत और छितौनी तटबंध पर 300 से अधिक रेनकट ने तटवर्ती लोगों की और मुश्किलें बढ़ा दी हैं। छितौनी बंधे पर पांच ठोकर बने हैं, जहां अधिक रेनकट है। नदी के जलस्तर पर में वृद्धि होने लगी है। नारायणी नदी चेतावनी बिंदु से 68 सेमी नीचे बह रही है। लोगों का कहना है कि अचानक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई तो तबाही मचनी तय है। बारिश के बाद बंधे पर बने रेनकट को ठीक कराने के लिए एक्सईएन ने बाढ़ खंड को निर्देश दिए हैं।
एपी बांध व नरवाजोत बांध पर स्वीकृत परियोजनाओं का कार्य जून के अंतिम सप्ताह में भी पूरा नहीं होने से बंधे के किनारे बसे गांवों के लगभग बीस हजार से अधिक आबादी को बाढ़ का खतरा सताने लगा है। लोगों का कहना है कि गंडक नदी का जलस्तर अब धीरे धीरे बढ़ना शुरू हो गया है। ऐसी स्थिति में अगर गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है तो बचाव कार्य प्रभावित होने के साथ तटबंधों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
वर्तमान में एपी बांध व नरवाजोत बांध पर सुरक्षात्मक कार्य को लेकर 32.71 करोड़ की लागत की तीन परियोजनाएं चल रही हैं। बाढ़ खंड की ओर से मार्च से ही बांध पर सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। नरवाजोत बांध पर दो व एपी बांध पर एक परियोजना चल रही है। पहली परियोजना के तहत 11.32 करोड़ की लागत से नरवाजोत बांध पर किमी 1.700 पर स्थित स्पर के नोज भाग के साथ ट्रांजिट एप्रन एवं किमी 1.950 से किमी 2.100 के बीच रिवेटमेंट पुनर्स्थापना का कार्य तथा किमी 0.000 से किमी 0.100 के बीच रिवेटमेंट और तीन पंक्ति में परक्यूपाइन का निर्माण चल रहा है, लेकिन यहां ठोकर के साथ अप एंड डाउन स्ट्रीम का कार्य अधूरा है, जबकि यह सर्वाधिक संवेदनशील हिस्सा है।
दूसरी परियोजना में 11.66 करोड़की लागत से नरवाजोत बांध पर स्थित किमी 0.525 से किमी 0.825 के बीच और किमी 0.825 से किमी 1.000 के बीच रिवेटमेंट पुनर्स्थापना कार्य के साथ किमी 0.525 से किमी 1.000 के बीच तीन पंक्ति में परक्यूपाइन का निर्माण हो रहा है। यहां रिवेटमेंट का कार्य अब भी अधूरा है। तीसरी परियोजना के तहत 9.72 करोड़ की लागत से एपी बांध के जवही दयाल में किमी 3.500 से किमी 4.000 के बीच रिवेटमेंट कार्य एवं तीन पंक्ति में परक्यूपाइन का निर्माण कराया जा रहा है। कार्य की रफ्तार धीमी है। कहीं स्लोप तो कहीं पैच और कई जगहों पर तो रिवेटमेंट का कार्य भी अधूरा है। हालांकि तीनों साइट पर जेई रमेशधर दुबे, सुनील कुमार यादव, विनोद शर्मा आदि कार्य पूरा कराने में लगे हैं। बाढ़ बचाव कार्य पूरा न होने से ग्रामीणों को बाढ़ व कटान का भय सताने लगा है। छितौनी बंधे पर पांच ठोकर हैं, जहां रेनकट अधिक है। भैंसहा गेज की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार की शाम चार बजे 94.32 मीटर पर नदी प्रवाहित हो रही थी। यह चेतावनी बिंदु से 68 सेमी नीचे है।
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बैराज से छूटा पानी तो मचेगी तबाही
क्षेत्र के पुजारी सिंह, रामायन राय, पारस निषाद, गौतम सिंह,अजय चौबे, प्रदीप सिंह आदि का कहना है कि क्षेत्र में मानसून कभी भी सक्रिय हो सकता है, ऐसी स्थिति में यदि वाल्मीकि नगर बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ने का सिलसिला शुरू होता है तो न केवल बचाव कार्य प्रभावित होगा, बल्कि अधूरे कार्य के चलते बांध और बांध के किनारे बसे गांवों के लगभग बीस हजार की आबादी को भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। इन लोगों ने धीमे कार्य पर रोष जताते हुए परियोजना के कार्यों को शीघ्र पूरा कराए जाने की मांग की है। बाढ़ खंड के एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि बांध की सुरक्षा विभाग की प्राथमिकता है। परियोजना कार्य की गति बढ़ा कर उसे शीघ्र पूरा कराए जाने की कोशिश की जा रही है और ठेकेदारों को भी निर्देशित किया है।
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2007 में टूट गया था एपी बांध
सेवरही में नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक लगभग साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में बहने वाली गंडक नदी के किनारों पर बरसात होने और रख रखाव के अभाव में बीस से अधिक स्थानों पर रेनकट बन गए है। इनकी मरम्मत अब तक नही कराई गई है। लोगों का कहना है कि जब नदी का पानी बांध के किनारे पहुंच कर तटबंधों से टकराने लगता है तो रेनकट कभी कभी तबाही का कारण बन जाते हैं। 31 जुलाई 2007 को इसी तरह के रेनकट के चलते नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद घघवा जगदीश स्थित एपी बांध टूट गया था और चालीस से अधिक गांवों के हजारों लोगों को महीनों तक बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ी थी। इसे याद कर आज भी तटबंधों के किनारे बसे गांवों के ग्रामीण सिहर उठते है।
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-बाढ़ से बचाव के लिए जो भी परियोजनाएं अधूरी हैं उसे पूरा करने के लिए बाढ़ खंड के एक्सईएन को निर्देश दिया गया है। बारिश में बने रेनकट और रैट होल को प्राथमिकता पर ठीक कराने का निर्देश दिया गया है। 15 दिन के अंदर अधूरे कार्य को पूरा करने का निर्देश दिया गया है। महेंद्र सिंह तंवर, डीएम कुशीनगर
एपी बांध पर जवही दयाल का अधूरा कार्य।संवाद