खाद्य सुरक्षा कानून के तहत बन रही राशन वितरण की नई सूची में गड़बड़ी की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। यहां तक कि संशोधित सूची में भी गड़बड़ी की शिकायत लेकर हर दिन लोग आपूर्ति कार्यालय पहुंच रहे हैं। इसके चलते गांवों में राशन वितरण के दौरान भी विवाद हो रहे हैं।
जिले में एक मार्च से खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राशन वितरण की नई व्यवस्था लागू की जा चुकी है। इसके तहत अंत्योदय परिवारों के अलावा बीपीएल व एपीएल श्रेणी से पात्र गृहस्थी का चयन किया जाना है। पात्र गृहस्थी को प्रति यूनिट पांच किलोग्राम (चावल व गेहूं मिलाकर) खाद्यान्न सस्ते दर पर दिया जाना है। पात्र गृहस्थियों के चयन के लिए जो मानक शासन ने निर्धारित किया है उसमें पांच एकड़ से कम कृषि योग्य भूमि तथा दो लाख रुपये से कम वार्षिक आय को आधार बनाया गया है। एक से अधिक असलहा के लाइसेंस धारकों और चार पहिया वाहन के मालिकों को इस सूची से बाहर रखा जाना है।
राशनकार्ड परिवार की महिला सदस्य को मुखिया मानकर जारी होना है। पात्र गृहस्थियों के चयन के लिए आपूर्ति विभाग ने पिछले साल ही प्रयास शुरू कर दिया था। इसके तहत पहले गांव-गांव लोगों से फार्म भरवाया गया था। जिनके नाम से राशनकार्ड नहीं था, उनसे ऑनलाइन आवेदन लिया गया था। फार्म व आनलाइन आवेदनों को ग्राम पंचायत सचिवों से सत्यापित भी कराया गया था। परंतु मार्च में जब पात्र गृहस्थियों की सूची जारी हुई तो पूरे जिले में खामियों की शिकायतें मिलने लगीं। किसी का नाम गायब था तो कहीं परिवार के सदस्यों की संख्या ही कम दर्शाई गई थी। कई गांवों में तो लोगों की जाति व पता तक गलत हो गया था। जिला पूर्ति कार्यालय पर शिकायतों और आंदोलनाें की झड़ी लगने के बाद विभाग ने आनन-फानन कोटेदारों के माध्यम से दुबारा इन्हें सही कराने का निर्देश दिया।
परंतु अगली बार भी वही गड़बड़ियां सामने आईं। लोगों ने कोटेदारों व प्रधानों पर गंवई राजनीति तथा व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसके बाद पिछले दिनों पुन: हर गांव में सूची भेजकर सत्यापन शुरू कराया गया। इस बार व्यवस्था यह बनी कि ग्राम पंचायत सचिव इन सूचियों की विधिवत जांच करते हुए पात्रों व अपात्रों की पुष्टि करेंगे। साथ ही अपात्रों का नाम काटते हुए उनकी जगह वंचित पात्रों का नाम शामिल करने की संस्तुति करेंगे। परंतु अब तक जमा हो चुकी करीब 700 ग्राम पंचायतों की सूची में फिर वही गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
पिछले सप्ताह फाजिलनगर ब्लाक का मामला डीएम के सामने प्रस्तुत हुआ जिसमें संशोधित सूची में भी 5-6 ऐसे नाम शामिल हैं जो पात्रता के मानकों के विपरीत हैं। उसी दिन विशुनपुरा ब्लाक के एक गांव के लोग शिकायत लेकर पहुंचे कि उनके गांव की सूची में कई नाम दूसरे गांव के हैं। रामकोला ब्लाक के एक गांव में भी दूसरे ब्लाक के 20 से अधिक लोगों के नाम की शिकायत सामने आई। शिकायतों की बढ़ती संख्या से नाराज डीएम ने जांच कर दोषियों पर मुकदमा दर्ज कराने तक आदेश दिया, लेकिन स्थिति में बहुत ज्यादे परिवर्तन नहीं आया।
जिला पूर्ति अधिकारीनरेंद्र तिवारी ने बताया कि पात्र गृहस्थी की सूचियों का सत्यापन करने के लिए ग्राम पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी दी गई है। इससे शिकायतों में कमी आई है, लेकिन अभी भी कुछ गड़बड़ियां हो रही हैं। सूची में अब उन्हीं का नाम जोड़ा जाएगा, जिनके आवेदन पत्र पर ग्राम पंचायत सचिव की तरफ से पात्र होने की रिपोर्ट लगाई जाएगी। इसके बाद भी गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।