फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच साल से सीटी स्कैन मशीन चली नहीं, दूसरी लगाने की तैयारी

Tue, 13 Mar 2018 12:01 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
विज्ञापन
सीटी स्कैैन मश्ाीन - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
विज्ञापन
पडरौना। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल हुए व्यक्ति हों या ब्रेन हैमरेज अथवा इस तरह की अन्य जटिल बीमारियों से ग्रस्त रोगी, इनकी सस्ती जांच का इंतजाम अब तक नहीं हो पाया है। कहने को संयुक्त जिला चिकित्सालय को पांच वर्ष पूर्व ही करीब दो करोड़ रुपये के लागत की सिटी स्कैन मशीन उपलब्ध करा दी गई थी, लेकिन टेक्निशियन और जेनरेटर के अभाव में यह मशीन अब भी बेकार सी पड़ी है। अब तो एक और नई सिटी स्कैन मशीन संयुक्त जिला चिकित्सालय में जल्द उपलब्ध होने वाली है। 
विज्ञापन


जनपद से होकर दो नेशनल हाइवे और एक स्टेट हाइवे के अलावा कई अन्य सड़कें गुजरती हैं। ऐसी दशा में यहां दुर्घटनाएं काफी अधिक होती हैं। जनपद में दुर्घटनाओं का अंदाजा सिर्फ इस बात से ही लगाया जा सकता है कि बीते वर्ष 2017 में 496 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 291 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2010 से लगायत 2017 तक सर्वाधिक सड़क हादसे बीते वर्ष हुए थे, जिनमें मरने वालों की तादाद भी हर वर्ष से अधिक थी। क्योंकि सड़क हादसों के दौरान सिर में गंभीर चोट आने की वजह से घायलों का सिटी स्कैन यहां नहीं हो पाता, जिससे मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है, तब तक खून इतना बह चुका होता है कि उनका बच पाना मुश्किल हो जाता है। ब्रेन हेमरेज, सिर के ट्यूमर सहित अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों का भी यहां सिटी स्कैन नहीं हो पाता। इसके लिए उन्हें जनपद में स्थित इक्का-दुक्का डायग्नोस्टिक सेंटर या फिर गोरखपुर जाने की विवशता रहती है। 


पांच वर्ष पूर्व कांग्रेस के कार्यकाल में तत्कालीन पेट्रोलियम राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने गैस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से संयुक्त जिला चिकित्सालय को 1.93 करोड़ रुपये की लागत की सिटी स्कैन मशीन उपलब्ध कराई थी। अस्पताल में यह मशीन स्थापित करा दी गई। तब से कई मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बदल गए, लेकिन इसे संचालित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ और 160 केवीए के जेनरेटर का प्रबंधक नहीं कराया जा सका। मरीजों को चार से पांच हजार रुपये खर्च कर प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच करानी पड़ती है। 
विज्ञापन



पांच वर्ष से बेकार सी पड़ी इस सिटी स्कैन मशीन को संचालित करने का सार्थक प्रयास अब तक नहीं हो पाया, लेकिन एक और नई सिटी स्कैन मशीन उपलब्ध कराने की तैयारी है। चर्चा है कि पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री की तरफ से उपलब्ध कराई गई मशीन शासन को वापस हो सकती है और उसकी जगह नई मशीन लगाई जाएगी। हालांकि कार्यवाहक सीएमएस ने इसे वापस किए जाने की बात से इनकार किया। 


पडरौना नगर के छावनी मोहल्ला के निवासी क्रांति (30) दो वर्ष पूर्व सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। देर शाम हुए इस सड़क हादसे के बाद परिवार के लोग उन्हें जिला अस्पताल ले गए थे, जहां सिटी स्कैन से जांच की सुविधा न होने के कारण डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। तब तक खून अधिक गिर जाने से हालत और बिगड़ गई थी, जहां से उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया था। वहां इलाज के दौरान दूसरे दिन उनकी मौत हो गई थी। 


संयुक्त जिला चिकित्सालय में उपलब्ध सिटी स्कैन मशीन डोनेट की हुई है। शायद इस वजह से शासन की तरफ से तकनीकी विशेषज्ञ और जेनरेटर उपलब्ध नहीं कराया जा सका। शासन की ओर से एक और नई सिटी स्कैन मशीन उपलब्ध कराई जानी है। दोनों सिटी स्कैन मशीनें यहां रहेंगी और उनका संचालन कराया जाएगा। 
विज्ञापन

डॉ. बजरंगी पांडेय, 
कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें