हाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के शनिवार को पांच डॉक्टर अचानक आकस्मिक अवकाश पर चले गए। दोनों महिला चिकित्सक भी एक साथ ही अवकाश पर रहीं। इसके चलते भीड़ बढ़ते ही अस्पताल में मरीजों के इलाज की व्यवस्था चरमरा गई। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी ने उच्चाधिकारियों को सूचना देते हुए डॉक्टरों पर मनमानी का आरोप लगाया। शुक्रवार को अस्पताल परिसर के पास स्थित दवा और अल्ट्रा साउंड केंद्रों की जांच के बाद चिकित्सकों के अचानक अवकाश लेने का मामला चर्चा का विषय बन गया है।
हाटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो महिला चिकित्सकों समेत कुल आठ डॉक्टर तैनात हैं। फोरलेन के नजदीक होने के चलते इस अस्पताल में दिन भर मरीजों की भीड़ रहती है। लोग लगातार अस्पताल के डॉक्टरों की तरफ से बाहर की दवाइयां लिखने की शिकायत कर रहे थे। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम हाटा जेपी गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ शुक्रवार को तीन अल्ट्रा साउंड केंद्रों के अलावा कई दवा की दुकानों की जांच की। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कई डॉक्टर लगातार मरीजों को कुछ चुनिंदा कंपनियों की दवाइयां लिख रहे हैं। एसडीएम ने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी थी। इसके बाद शनिवार को यहां तैनात पांच डॉक्टर अस्पताल ही नहीं पहुंचे। अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। बाद में पता लगा कि पांच डॉक्टर अचानक ही छुट्टी पर चले गए हैं। डॉक्टरों के अस्पताल नहीं आने के चलते काफी इंतजार के बाद मरीज वापस लौट गए। कई मरीजों ने इलाज के लिए निजी डॉक्टरों के क्लीनिक की राह पकड़ ली तो बाकी व्यवस्था को कोसते हुए अपने घर चले गए। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर रमेश चंद्रा ने बताया कि किसी भी डॉक्टर को छुट्टी नहीं दी गई है। सभी अपने मन से गायब है। इसकी जानकारी सीएमओ को दे दी गई है। इस तरह से एक साथ कई डॉक्टरों के नहीं आने से अस्पताल की व्यवस्था में दिक्कत आई है।