पडरौना। जिले में होली व दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों पर मिलावट का गोरखधंधा किस कदर परवान चढ़ जाता है, इसे बयां करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से की गई कार्रवाई के आंकड़े ही काफी हैं। इस विभाग ने बीते अप्रैल से लेकर जनवरी तक जिन 187 खाद्य वस्तुओं के नमूने जांच के लिए लैब भेजा था, उनमें से 89 में मिलावट मिली है। इनमें सात ऐसे नमूने पाए गए, जो दूसरी कंपनियों की नकल कर तैयार किए गए थे, लेकिन गुणवत्ता के मामले में निहायत खराब थे, जबकि दो सैंपल में हानिकारक तत्वों का मिश्रण पाया गया।
बाजार में खान-पान से जुड़ी सभी प्रकार की खाद्य वस्तुओं की थोक एवं फुटकर दुकानों के साथ-साथ गोदामों पर नजर रखने और जांच के लिए जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग है। कलेक्ट्रेट स्थित इस दफ्तर में अफसरों और कर्मचारियों का पूरा स्टॉफ है। बावजूद इसके प्रमुख त्योहारों को छोड़ दिया जाए तो सामान्य दिनों में शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में इनकी सक्रियता काफी कम दिखती है। बावजूद इसके जो नमूने इस विभाग ने संग्रहित कर लैब में भेजे थे, उनमें ज्यादातर जांच में गड़बड़ पाए गए।
अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 तक विभाग के अफसरों और कर्मचारियों ने जनपद में जो छापेमारी और जांच के दौरान खाद्य वस्तुओं के 187 नमूने लिए। लैब में परीक्षण के दौरान 89 नमूने फेल कर गए। 40 सैंपल में मानकों की अवहेलना पाई गई। सात मिथ्याछाप और दो असुरक्षित पाए गए। 39 सैंपल में कोई कमी नहीं मिली। 109 सैंपल की जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। मिलावटी खाद्य वस्तुएं बेचने वाले 133 खाद्य कारोबारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए। इनमें 34 खाद्य कारोबारियों पर एडीएम न्यायालय की तरफ से 4.36 लाख रुपये अर्थदंड लगाया गया है।
गोरखपुर और बस्ती मंडल में कोई ऐसा विभागीय लैब नहीं है, जहां सैंपल की जांच हो सके। सभी जनपदों से सैंपल एकत्र कर आगरा के लैब में भेजा जाता है। अभिहीत अधिकारी के मुताबिक वैसे तो जांच 15 दिनों में पूरी हो जाती है, लेकिन रिपोर्ट मिलने में एक माह से लगायत तीन माह तक लग जाता है।
खाद्य वस्तुओं में मिलावट की लैब से पुष्टि होने पर इससे जुड़े मुकदमे दो न्यायालयों में चलते हैं। अपर जिलाधिकारी के न्यायालय में अर्थदंड से संबंधित वाद दाखिल होते हैं और वहां सुनवाई होती है। इसके अलावा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सजा और दंड दोनों देने का अधिकार होता है। वहां जुर्माना और कारावास संबंधी सजा सुनाई जाती है।
खाद्य पदार्थ में मिलावट करने पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 में सजा का प्रावधान किया गया है। मिलावट अगर मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो तीन साल से लेकर आजीवन कैद तथा पांच लाख रुपये तक जुर्माने की सजा है। अगर किसी खाद्य पदार्थ में ऐसी मिलावट है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है तो पांच लाख रुपये तक जुर्माने की सजा है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अभिहीत अधिकारी रामअवतार सिंह यादव का कहना है कि विभाग की तरफ से समय समय पर जांच की जाती है। केवल इस वर्ष जनवरी से अब तक जनपद के विभिन्न हिस्सों में की गई छापेमारी और जांच में 50 सैंपल लेकर लैब को भेजे जा चुके हैं। अभी यह कार्रवाई होली तक जारी रहेगी। मिलावटी खाद्य वस्तुओं की बिक्री की सूचना जहां से भी आती है, वहां पहुंचकर जांच की जाती है तथा सैंपल लिया जाता है। खाद्य वस्तुओं में मिलावट की पुष्टि होने पर मुकदमा के साथ-साथ जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अभिहीत अधिकारी रामअवतार सिंह यादव की अगुवाई में मंगलवार को हाटा में अभियान चलाया गया। एसडीएम विपिन कुमार की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई में छेने की मिठाई तथा वनस्पति घी के नमूने लिए गए। झांगा में धनिया साबुत का नमूना लिया गया। इस दौरान अमित कुमार राना, सतीश कुमार एवं मनोज श्रीवास्तव भी शामिल थे।