रामकोला। बेटी की शादी तय होने के बाद दरवाजे पर जर्जर एक कमरे की मकान को तोड़कर टिनशेड का निर्माण कराने की तैयारी थी। लेकिन, ईश्वर को कुछ और मंजूर था। अचानक मकान मकान की छत गिर गई और इसमें दबकर दोनों भाइयों की मौत हो गई। दिल दहला देने वाली घटना से गांव में मातम छा गया और घर वालों में चीख-पुकार मच गई। बेटी की डोली से पहले पिता की अर्थी उठ गई।
प्रभु खटीक के दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। बड़ी बेटी रंजू की शादी नवंबर में होनी थी। इसकी तैयारी में लोग जुटे थे। मकान जर्जर हो गया था। घर वालों ने शादी से पहले टिनशेड का निर्माण कराने की योजना बनाई। मजदूर नहीं मिले तो शंकर और उनके दोनों बेटे शंभू और प्रभु जर्जर मकान को खुद तोड़ने लगे। मकान की छत तोड़ने के दौरान पूरा मकान एक साथ ही गिर गया। इसमें तीनों दब गए। आधे घंटे की मशक्कत के बाद परिजनों ने गांव वालों की मदद से मलबे में दबे लोगोंं को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। लेकिन दोनों भाइयों की जान नहीं बच सकी। वहीं, शंभू की छह बेटियां हैं, इसमें एक बेटी की शादी हुई है। दूसरे नंबर की बेटी का रिश्ता तय करने के लिए शंभू और प्रभु शनिवार को गए थे, बुधवार को फिर जाना था। दोनों भाइयों का प्रयास था कि नवंबर में दोनों लड़कियों की एक साथ ही शादी कर दी जाए।
कुछ समय पहले ही नीचे उतर गए थे शंकर के दोनों नाती
-शंकर खटीक के दोनों पुत्र मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। रविवार की सुबह शंकर, इनके बेटे शंभू व प्रभु पुरानी छत को हथौड़े से तोड़ रहे थे। उस वक्त शंकर के दोनों नाती व प्रभु के बेटे हिमांशु 11, सुभाष 14 भी छत पर ही मौजूद रहे। जिस समय हादसा हुआ, उसके कुछ ही मिनट पहले हिमांशु, सुभाष नीचे उतरे थे। इसको लेकर गांव वालों में चर्चा रही कि संयोग अच्छा था कि शंकर के दोनों नाती घटना से से पहले छत से उतर चुके थे। घटना के समय तेज आवाज और घर वालों की शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंच गए।
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पटीदारों के घर नहीं जला चूला,बच्चों को गांव के लोगों ने कराया भोजन
कई दिनों से शंकर के मकान का छत तोड़ने की तैयारी चल रही थी, लेकिन सरसों की कटाई होने के कारण परिवार के लोगों को समय नहीं मिल रहा था। रविवार की सुबह ही शंकर व उनके पुत्र शंभू, प्रभु तीनों छत तोड़ने के लिए जुट गए। शंकर की पत्नी फूलपती ने बताया कि भोजन नहीं बना था। सुबह से मकान तोड़ने में सभी लोग लगे थे। घटना के बाद पटीदार चंद्रभान, रमेश, महेंद्र, पप्पू आदि के घर भी खाना नहीं बना था। शंकर के घर के बच्चों को गांव के लोगों ने भोजन कराया।
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मजदूरी से ही होनी थी बेटियों की शादी
शंभू और प्रभु दोनों भाई मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। शंभू की छह बेटियां हैं। जबकि प्रभु के दो बेटे व दो बेटियां हैं। शंभू ने तो एक बेटी की शादी कर दी थी, लेकिन पांच बेटियों के हाथ पीले करने के लिए वह जी-तोड़ मेहनत कर रहे थे। घटना के एक दिन पहले ही शंभू की पत्नी सरोज देवी महराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र के बसंतपुर के बरगदवा गांव में मायके गई थीं। घटना की सूचना मिलते ही वह छोटे भाइयों सोनू व मोनू के साथ रविवार को घर आई और पति की मौत की खबर सुनते ही रो-रोकर बेहोश हो जा रही थीं। परिवारवालों के अनुसार, शंभू की छह में से एक बेटी इंदू की शादी हो गई हैं। जबकि प्रियंका की शादी के लिए शंभू भाग-दौड़ कर रहा था। वहीं, मृतक प्रभु की पत्नी पार्वती ने बताया कि बड़ी बेटी नेहा की शादी तय हो गई थी, लेकिन आर्थिक कारणों से शादी की तिथि तय नहीं हो सकी है। शादी को लेकर बेटी को देने के लिए सामान आदि जुटाने की तैयारी की जा रही थी।
परिजनों के चीत्कार से गांव का माहौल गमगीन
हादसे में दो भाइयों की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों की चीत्कार से गांव का माहौल गमगीन हो उठा। पहले तो शंभू के मौत की खबर गांववालों व परिजनों को मिली, लेकिन जब प्रभु की भी मौत की सूचना मिली तो पूरा गांव उमड़ पड़ा। लोग परिजनों को ढांढ़स बंधाने लगे। इस दौरान गांववालों की आंखें भी नम हो गईं।