तमकुहीरोड। पिपराघाट में बांध निर्माण के लिए सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग की तरफ से अधिग्रहीत की गई भूमि के मुआवजा के लिए किसानों ने सोमवार को बांध पर प्रदर्शन किया। इनका कहना था कि अधिग्रहण के एक वर्ष बाद भी जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि मुआवजा जल्द नहीं मिला तो बंधे का काम रोक देंगे।
पिपराघाट गांव को बड़ी गंडक से बचाने के लिए सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग ने संयुक्त रूप से पिछले साल अप्रैल माह में 3.300 किलोमीटर लंबे बांध के निर्माण का कार्य 42.53 करोड़ रुपये की लागत से शुरू करा दिया था। इसके पहले यह तय हुआ था कि किसानों की जितनी भूमि बांध के निर्माण में प्रयुक्त होगी, उसका सर्किल रेट से किसानों को भुगतान कराया जाएगा, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी किसानों को उनकी भूमि का मुआवजा नहीं दिया गया है। इससे नाराज किसानों ने सोमवार को बांध पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया और मुआवजा दिलाने की मांग की। किसानों का कहना था कि उनकी भूमि का मुआवजा 90 दिन के भीतर मिल जाना चाहिए था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला, जबकि जिन किसानों ने बांध के निर्माण में अपनी जमीन दे दी है, उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उनके पास खेती के लिए जमीन नहीं बची है।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के एई रमेश यादव का कहना है कि किसानों की जमीन का मुआवजा शीघ्र दिला दिया जाएगा। प्रदर्शन करने वालों में पिपराघाट बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश राय, पुजारी सिंह, हरिहर यादव, सुरेंद्र सिंह, रामायण राय, सकलदेव सिंह, प्रभुनाथ यादव, मदन सिंह, हरेंद्र, बलिराम, शिवपूजन, काशी, केदार, शंभू, हीरामन आदि शामिल थे।