तुर्कपट्टी। रबी सीजन की बोआई के महत्वपूर्ण समय में डीएपी और एनपीके खाद की किल्लत से किसानों की चिंता बढ़ गई है। साधन सहकारी समिति महुअवा बुजुर्ग महासोंन पर सप्ताह में एक से दो दिन ही खाद पहुंच रही है। सीमित आपूर्ति के मुकाबले किसानों की संख्या अधिक होने से उन्हें घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। खाद के अभाव में तिलहन, गन्ना और सब्जियों की बोआई प्रभावित हो रही है।
समिति पर खाद लेने के लिए प्रतिदिन 400 से 600 किसान आधार कार्ड और खतौनी लेकर पहुंच रहे हैं। किसान सुबह छह बजे से ही कतार में लग जाते हैं, लेकिन समिति पर 150 से 200 बोरी खाद ही उपलब्ध हो पाती है। ऐसे में अधिकांश किसानों को निराश होकर लौटना पड़ता है। कई किसान लगातार कई दिनों से समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी बारी आने से पहले ही खाद खत्म हो जाती है।
किसानों का कहना है कि बोआई का समय तेजी से निकल रहा है। खेत तैयार होने के बावजूद खाद नहीं मिलने से बोआई टालनी पड़ रही है। इससे फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। एक ओर खेती की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर समय पर खाद नहीं मिलने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
लवकुश निवासी किसान हरेराम सिंह ने बताया कि वह सुबह छह बजे से खाद के लिए कतार में खड़े थे, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल सकी। कई दिनों से यही स्थिति बनी हुई है। हर बार घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर लौटना पड़ता है।
महुअवा कारखाना निवासी किसान भोला प्रसाद ने कहा कि बोआई का समय निकलता जा रहा है, लेकिन खाद के अभाव में खेतों में काम शुरू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने मांग की कि समिति पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसानों को समय से खाद मिल सके।
समिति को प्रतिदिन केवल 150 से 200 बोरी डीएपी और एनपीके खाद की आपूर्ति मिल रही है, जबकि खाद लेने के लिए 400 से 600 किसान पहुंच रहे हैं। मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने के कारण सभी किसानों को खाद उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा है। अतिरिक्त खाद उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। आपूर्ति बढ़ने पर किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
डॉ. रमेश त्रिपाठी, अध्यक्ष साधन सहकारी समिति महुअवा बुजुर्ग