पडरौना। कड़ी धूप और सड़क पर उड़ती धूल से आंखों को तकलीफ हो रही है। गर्मी और शुष्क हवा की वजह से मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में आंखों के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। कंजक्टिवाइटिस, एलर्जी, शुष्क आंखें और आंखों में जलन-खुजली की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही हैं। डॉक्टर मरीजों को दवा देने के साथ आंखों को धूप और धूल से बचाव करने की सलाह दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में पिछले 15 दिनों में आंखों के मरीज करीब 20 प्रतिशत बढ़ गई है। रोजाना ओपीडी में 150-200 मरीज आ रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में ये संख्या 100-130 रहती थी। सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वालों पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. संजय ने बताया कि इस मौसम में धूल, प्रदूषण और तेज यूवी किरणें तीनों एक साथ आंखों पर हमला कर रही हैं। इससे आंखों में लालपन, पानी आना, रेत जैसा चुभन और धुंधला दिखने की शिकायत बढ़ी हैं। कंजक्टिवाइटिस के केस सबसे ज्यादा हैं, जो एक से दूसरे में बहुत तेजी से फैलता है।
उन्होंने बताया कि आंखें बहुत नाजुक हैं। धूप-धूल से बचाव में लापरवाही भारी पड़ सकती है। 200-300 रुपये तक का अच्छा चश्मा आपकी आंखों की हजारों की सर्जरी बचा सकता है। मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने पहुंचे सुनील कुमार मिश्र, श्रीनेत कुशवाहा आदि ने बताया दो दिन आंखें लाल और सूजी रहीं। डॉक्टर ने चश्मा लगाने को कहा। अब धूप में भी आराम है। वहीं कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में पहुंची माधुरी देवी ने बताया कि धूप में आते ही आंखों में चुभन शुरू हो जाती थी। डॉक्टर की सलाह पर एंटी-ग्लेयर चश्मा ले लिया, अब राहत है।
धूप से बचाव के लिए यह करें उपाय
- यूवी प्रोटेक्शन वाला सनग्लास या पावर का चश्मा धूप-धूल दोनों से बचाता है। बिना चश्मे घर से न निकलें।
- धूल जाने पर आंख मलने से कॉर्निया पर स्क्रैच आ सकता है। साफ पानी से धोएं या आर्टिफिशियल टीयर्स डालें।
- कंजक्टिवाइटिस हाथों से ही फैलता है। बार-बार हाथ धोएं, तौलिया अलग रखें।
- इस मौसम में लेंस लगाने से इंफेक्शन का रिस्क तीन गुना बढ़ जाता है। चश्मा ही बेस्ट है।
- लालपन दो दिन से ज्यादा रहे, तो डॉक्टर को दिखाएं। खुद से कोई ड्रॉप न डालें।
- स्टेरॉयड वाली ड्रॉप बिना सलाह के आंख खराब कर सकती है।
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