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Kushinagar News: काशी विश्वनाथ के पौराणिक व धार्मिक महत्व बताए

Thu, 11 Jun 2026 02:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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लक्ष्मीगंज। पगार छपरा गांव के संकटमोचन मंदिर परिसर में चल रहे 11 दिवसीय रुद्र महायज्ञ में बुधवार को कथावाचक पंडित प्रदीप सागर ने काशी विश्वनाथ के पौराणिक व धार्मिक महत्व की कथा सुनाई। कथा सुनकर पंडाल में बैठे श्रोता भाव-विभोर हो गए। कथावाचक ने कहा कि ईश्वर में आस्था हमारे देश की परंपरा ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भक्तिमय माहौला विचारों को शुद्ध करता है और तन-मन को शांति देता है। जिसका एहसास हमारी आत्मा को हो ही जाता है। तभी तो जब कोई खुशी या दु:ख का अवसर होता है या मन की बात ईश्वर से करनी हो तो हमारे कदम मंदिरों की ओर चल पड़ते हैं।
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उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री काशी विश्वनाथ दो भागों में है। दाहिने भाग में शक्ति के रूप में मां पार्वती विराजमान हैं, दूसरी ओर भगवान शिव वाम रूप में विराजमान हैं। काशी अनंतकाल से बाबा विश्वनाथ के जयकारों से गूंज रही है। शिवभक्त यहां मोक्ष की कामना से आते हैं। यह भी माना गया है कि काशी नगरी शिवजी के त्रिशूल पर टिकी है व जिस जगह पर ज्योतिर्लिंग स्थापित है,वह जगह कभी भी लोप नहीं होती। कहा कि स्कंद पुराण के अनुसार जो प्रलय में भी लय को प्राप्त नहीं होती, आकाश मंडल से देखने में ध्वज के आकाश का प्रकाश पुंज दिखती है, वह काशी अविनाशी है।
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