तरावीह की नमाज अदा करने और मजलूमों को जकात देने से हासिल होती है अल्लाह की नेमत
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। रमजान पाक का महीना बृहस्पतिवार से शुरू हो जाएगा। बुधवार को दिनभर इसकी तैयारी चलती रही। रोज रखने वालों ने दिनभर बाजार में खरीदारी की। इस महीने में रोजा रखने, झूठ-फरेब से परहेज करने, कुरान की तिलावत के साथ तरावीह का नमाज अदा करने और मजलूमों को जकात देने से अल्लाह की नेमत हासिल होती है।
धर्म गुरुओं का कहना है कि इस्लाम धर्म की कई मजहबी किताबें इसी महीने में नाजिल (अवतरित) हुई थीं। शाही जामा मस्जिद तुलसीनगर के मौलाना कारी जिकरुल्लाह ने बताया कि इस महीने को तीन असरों में तकसीम किया जाता है। दस दिन का पहला आसरा रहमत का, दूसरा आसरा बरकत का और तीसरा आसरा मगफिरत का होता है। इन तीस दिनों में मुस्लिम समुदाय के लोग झूठ-फरेब से तौबा कर रोजा रखते हैं और कुरान की तिलावत के साथ रोजाना तरावीह की नमाज अदा करते हैं।
मौलाना इकबाल अहमद अमजदी का कहना है कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार इस्लाम की मजहबी किताबें क़ुरान, इंजील, जबूर और इब्राहिम के शहीफे इसी महीने में नाजिल हुईं थीं। मान्यता है कि इन धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना आवाम को अल्लाह के करीब ले जाने का सशक्त माध्यम है।
मदरसा दारुल ईशायत तमकुहीरोड के मौलाना शब्बीर अली शम्सी ने बताया कि रमजान का पाक महीना मुसलमानों के लिए अफजल का महीना होता है। त्योहार की तैयारियों में जुटे सफदर हुसैन खान, अशरफ़ अली, फैयाज अहमद, जाकिर हुसैन, मुश्ताक अहमद, सिकंदर अली, मोहम्मद मिकाइल, रेयाज हाशमी, इमरान अजमेरी आदि भी रमजान को नेकी व बरकत का महीना मानते हैं।